आत्म गौरव जागृत करने का नाम है ‘आत्म निर्भर भारत’-श्रीनिवासजी

आत्म गौरव जागृत करने का नाम है ‘आत्म निर्भर भारत’-श्रीनिवासजी

प्रमोद कुमार
मोतिहारीlपु०च०
देश आज कई मोर्चों पर एक साथ लड़ाई लड़ रहा है। कोरोना संकट से कम से कम जन हानि हो, देशवासियों का विश्वास किसी भी प्रकार कम न हो इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर लड़ाई लड़ी जा रही है। यह वह देश है जहां शरीर पर एक धोती लपेटकर, लाठी लेकर चलने वाले महात्मा गांधी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नेतृत्व किया। उन्होंने केवल स्वतंत्रता की बात नहीं की बल्कि राम राज्य और ग्राम स्वराज की भी बात की थी। आज कोरोना संकट में वही बातें हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं। ये बातें सामाजिक चिंतक श्रीनिवासजी ने महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय और ‘मानवता के समग्र विकास के लिए छात्र’ संगठन (शोध), बिहार के संयुक्त तत्वावधान में ‘आत्मनिर्भर भारत के उभरते परिदृश्य में ग्रामीण विकास’ विषय पर आयोजित वेबिनार में कही। आत्म निर्भर भारत अभियान के संबंध में चीन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी के प्रतिक्रिया में अथवा किसी देश को पीछे करने के लिए भी नहीं बल्कि ‘आत्म निर्भर भारत’ प्रत्येक भारतवासी के आत्म गौरव को जागृत करने का नाम है। सबके लिए रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और दवाई का प्रबंध होने की बात करते हुए कहा कि जब तक हम दत्तोपंत ठेंगड़ी के भारत की अवधारणा नहीं समझेंगे तब तक भारत का विकास नहीं कर सकेंगे।इससे पूर्व जीआरसी इंडिया के प्रबंधन निदेशक डॉ. धीरज कुमार सिंह ने बतौर मुख्य वक्ता अपने संबोधन में कहा कि जनमानस में ‘आत्म निर्भर भारत’ अभियान को लेकर एक विशिष्ट वातावरण निर्मित हो रहा है। इससे देश में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जो विकास होगा उससे प्रत्येक भारतीय के जीवन में गुणवत्ता आएगी। हमारे उत्पादों की मात्रा ही नहीं बढ़ेगी बल्कि उनमें गुणवत्ता भी आएगी। लोकल के लिए वोकल होने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे कई प्रकार से विकास एक साथ नज़र आएंगे। आधारभूत संरचना का निर्माण होगा, सड़कें बनेंगी, रोजगार की स्थिति अच्छी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और अशिक्षा की स्थिति सुधरेगी।प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। यह हमारे कुल जीडीपी का 10 प्रतिशत है। आज हमें मिल-जुलकर इसका लाभ उठाने की आवश्यकता है। डिमांड और सप्लाई चैन को संतुलित करने की जरुरत है। गांधी जी, एपीजे अब्दुल कलाम और नानाजी देशमुख जैसे महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलते हुए हम अपने ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करते हुए सम्पूर्ण देश का विकास कर सकते हैं। विश्वविद्यालयों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि स्नातक स्तर से ही विद्यार्थियों में उद्यमिता के प्रति उत्सुकता पैदा करना, बिजनेस प्लानिंग सीखाना, उद्यमिता का प्रचार करना आवश्यक है। वहीं जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अधिष्ठाता, छात्र कल्याण, डॉ सुधीर प्रताप सिंह ने बतौर विशिष्ट अतिथि अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण विकास सदैव ही महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है लेकिन आज इसकी जरुरत कुछ ज्यादा ही है। आत्म निर्भर भारत योजना का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश में काम काज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए और अपनी अधिकतम चीजों के लिए हम खुद पर निर्भर हों। इसके लिए स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। आगे कहा कि आत्म निर्भर भारत का मतलब आत्मकेंद्रित होना नहीं है, बल्कि यह समाज केंद्रित योजना है। इसके लिए तमाम जटिलताओं को सरल किया जा रहा है। लघु उद्योगों की परिभाषा नये सिरे से तय की गयी है। कोरोना एक विश्वव्यापी संकट है इसे अवसर में कैसा बदला जाए, इस दिशा में काम हो रहा है। सरकार ने योजना बनाई है कि जो लोग गांव की ओर माइग्रेट होकर आए हैं उनका उपयोग ग्रामीण विकास के कार्यों में हो। मनरेगा में सरकार ने बड़े पैमाने पर अतिरिक्त पैसा लगाया है।अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने इस महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित वेबिनार में बड़ी संख्या में देश के तमाम राज्यों से लोगों के जुड़ने पर प्रसन्नता जताई। सभी वक्ताओं एवं सहभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि विवि. में इस तरह के बौद्धिक आयोजन लगातार हो रहे हैं। ई-ज्ञान सीरिज आयोजित हुए। विभिन्न विभागों द्वारा 50 से अधिक वेबिनार कराए जा चुके हैं। विषय पर केंद्रित होते हुए कहा कि आत्म निर्भरता का मतलब दुनिया भर में जो कुछ अच्छा है, शुभ है वह हम तक आ जाए और मेरे पास जो अच्छा है वह पूरे विश्व में फैल जाए, सब सुखी हों। भारतीय संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि जो मेरे-आपके लोकाचार, शिष्टाचार के विषय थे, कोरोना काल में अब विश्व के लिए वह ग्राह्य हो गये हैं।वेबिनार के संयोजक एवं केविवि के वाणिज्य एवं प्रबंधन विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. पवनेश कुमार ने इस सफल आयोजन के लिए सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.शर्मा का आभार जताया। वेबिनार से जुड़े विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों के सहयोग के लिए सराहना करते हुए अन्य सहभागियों के प्रति भी आभार ज्ञापित किया और आगे भी ऐसे वेबिनार आयोजित करने की बात कही। वेबिनार के आयोजन सचिव व ‘मानवता के समग्र विकास के लिए छात्र’ संगठन (शोध), बिहार के राज्य संयोजक गौरव रंजन ने सभी वक्ताओं एवं अतिथियों का संक्षिप्त परिचय देते हुए स्वागत किया एवं बड़ी संख्या में जुड़े सहभागियों का भी स्वागत किया।प्रबंधन विज्ञान विभाग के शोधार्थी चंदनवीर ने वेबिनार का संचालन किया। वेबिनार में केविवि के प्रो. राजीव कुमार, प्रो. सुधीर कुमार साहू, डॉ. सपना सुगंधा, डॉ.अल्का लल्हाल, डॉ. स्वाति कुमारी, कमलेश कुमार, डॉ. दिनेश व्यास, डॉ.पाथलोथ ओंकार, पीआरओ शेफालिका मिश्रा, सिस्टम एनालिस्ट दीपक दीनकर, माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के डॉ.आदित्य मिश्रा समेत बड़ी संख्या शिक्षक, विद्यार्थी, शोधार्थी व देश के विभिन्न विवि के विद्वान ऑनलाइन उपस्थित रहे।

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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