चनपटिया,बेतिया तथा समस्तीपुर के लिए नौ प्रवासी मजदूर लखनऊ से चल दिये पैदल,पांच दिन मे पहुँचे बगहा

चनपटिया,बेतिया तथा समस्तीपुर के लिए नौ प्रवासी मजदूर लखनऊ से चल दिये पैदल,पांच दिन मे पहुँचे बगहा

दिवाकर कुमार

बगहा (25/04/2020): लॉक डाउन के चलते उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर में रहने वाले बिहार के चनपटिया,बेतिया तथा समस्तीपुर प्रवासी दिहाड़ी मजदूरों के सामने रहने-खाने का संकट मड़राने पर,उनका सब्र का बांध टुट पड़ा,जिस कारण वो अपने घर के तरफ पैदल ही पलायन कर गये।आज शनिवार को लॉक डाउन के 32वां दिन नौ की संख्या में चनपटिया,बेतिया तथा समस्तीपुर के दिहाड़ी मजदूर एक साथ रेलवे लाइन के रास्ते विमल बाबू के खेल मैदान पहुचें,जहाँ स्थानीय युवकों ने एक साथ इतने मजदूरों को देख त्वरित उन सभी को स्थानीय शहरी अर्बन पीएचसी बगहा दो भेजा।जहां खुद दिहाड़ी मजदूर पैदल चलकर अपीएचसी बगहा दो पहुचें।जहां सभी दिहाड़ी मजदूरों को बारी- बारी से स्क्रीनिंग करने के पश्चात पीएचसी टीम ने उन सभी मजदूरों की विधिवत जानकारी ली। उन सभी को स्थानीय सीओ राकेश कुमार को सौंप दिया गया।सीओ बगहा-2 ने सभी मजदूरों को राजकीय मध्य विद्यालय पटखौली बगहा 2 में 14 दिनों के लिए क्वॉरेंटाइन के लिए भेज दिया।सभी मजदूर बिहार के समस्तीपुर, बेतिया तथा चनपटिया के रहने वाले हैं।
समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखण्ड के बसंत कुमार,दीपक कुमार,नितिन कुमार और बेतिया जिले के सरिसवा बगड़वा के शुत्रधन भगत तथा चनपटिया घोघा के संजय पाल, झुनझुन पाल,उपेंद्र यादव,हरिओम साह,अनुरुद्ध महतो रहे।
उन सभी ने गुहार लगाई की काम ठप हो जाने से हम सभी खाने तक के मोहताज हो गए हैं। लखनऊ के तिवारीगंज में ए.के पाईनल प्लाई बोर्ड कम्पनी में हम सभी काम करते थे।वहां के रूम रेंट के पैसे देने तक को नहीं था।वही कंपनी के मालिक ने हम सभी खर्चा चलाने में असमर्थ दिखा और जितने पैसे कमाए हुए थे तभी खत्म भी हो गए थे।जिसके चलते हम सभी लखनऊ से पैदल रेलवे लाइन के रास्ते घर को वापस चल दिये।लख़नऊ से चार दिन में यानि 24 अप्रैल को उत्तरप्रदेश के सिसवा रेलवे स्टेशन देर शाम पहुचें।जहां सिसवा रेलवे स्टेशन पर मौजूद समाजसेवियों ने हम सभी को पेट भर भोजन कराया तपश्चात वहां से हम सभी चल दिये और आज पांचवे दिन हम सभी बगहा पहुचें हैं। समस्तीपुर,बेतिया जिलें में हम सभी का घर हैं।जहां मां, पत्नी, बच्चे सब अकेले हैं।लॉक डाउन हुए इतना दिन हो गया घर के सब परेशान हैं।अब खाने तक के मोहताज हो गए।जिसके चलते हम सभी घर जाना चाहते हैं। ताकि घर पहुँचकर बच्चों को पेट भर सके और अपने घर पर सुरक्षित रह सकें उन्होंने पदाधिकारियों से गुहार लगाई की हम सभी को हमें अपने घर के स्थानीय विद्यालयों या कही भी रख दिया जाए।क्योंकि 14 हम सभी यहां भी रहेंगे फिर जाने के बाद स्थानीय भी इतना रहना पड़ा।तो परिवार भूखे मर जायेगा।

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