सदर एसडीएम के द्वारा मुस्लिम समुदाय के लोगों को रमजान में सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर इबादत करने की नसीहत दी

सदर एसडीएम के द्वारा मुस्लिम समुदाय के लोगों को रमजान में सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर इबादत करने की नसीहत दी

 

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया 24 अप्रैल : स्थानीय शहर के जंगी मस्जिद के प्रांगण में सभी मस्जिदों के इमाम, मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच रमजान के पवित्र महीने में इबादत करने के लिए अपने अपने घरों में, सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर नमाज पढ़ने, तरावीह पढ़ने , कुरान की तिलावत करने व अन्य इबादत करने की सलाह दी। इस अवसर पर बेतिया सदर एसडीएम ,विद्या नाथ पासवान,सदर डीएसपी, नगर थाना प्रभारी के अलावा पुलिस बल की उपस्थिति सराहनीय रही।
इस अवसर पर मस्जिदों के इमाम के अलाव जमीअतुल उलमा ए हिंद के स्थानीय अध्यक्ष और सचिव, सदस्य, जमात इस्लामी हिंद, बेतिया शाखा के अमीर, मौलाना हसन माविया नदवी, मौलान नजमुद्दीन कासमी, मौलाना महबूब नोमानी, आमिरअराफात कासमी, बेतिया बड़ी मस्जिद के सचिव, शफ़्क़त रजा, मगफुर अहमद, जाकिर्र बलिग, जंगी मस्जिद के भी इमाम, मस्जिद कमेटी के लोग, अन्य मस्जिदों के इमाम व कमेटी के लोग इस अवसर पर उपस्थित थे।
बेतिया सदर अनुमंडल पदाधिकारी ने सभी लोगों से अपील की कि आप लोग इस पवित्र रमजान महीने में शांति बनाए रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए अपने-अपने इबादत को करें ,साथ ही सभी मुस्लिम भाइयों से यह अपील भी करें के सभी लोग अपने अपने घरों में इस पवित्र रमजान की पवित्रता को ध्यान रखते हुए इबादत करें और लोगों को भी समझाएं कि लोग इस पवित्र महीने में शांति बनाए रखें और प्रशासन को भी अपना सहयोग दें ताकि प्रशासन भी आपके साथ रहकर आपके हर कदम में साथ देने का संकल्प ले।
इमारत शरिया के जरिए दिए गए नोटिस का हवाला देते हुए मस्जिद के इमामों ने बताया कि रमजान को गुजारने के लिए सभी तरह का नियम और कानून मुस्लिम समाज के लोगों के पास आ गई है और इसी के तहत व सभी मुस्लिम संप्रदाय के लोग इस रमजान के पवित्र महीने में अपने-अपने घरों में, सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए इबादत करेंगे।

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“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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