शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्णय के विरोध में एबीवीपी एवं समाजसेवियों ने जताया विरोध 

शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्णय के विरोध में एबीवीपी एवं समाजसेवियों ने जताया विरोध

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया  :   बेतिया कोविड-19 के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने 4 अप्रैल से एक 11 अप्रैल तक सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का जो आदेश निर्गत किया है, इस आदेश के खिलाफ में जहां पढ़ने वाले छात्र और छात्रा तथा अभिभावक खुलकर विरोध कर रहे हैं ,इस संदर्भ में, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एसएफएस के प्रमुख ,किशन श्रीवास्तव के नेतृत्व में, दर्जनों छात्रों ने जहां मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया ,वहीं सरकार विरोधी नारे भी लगाए ,विरोध करने वालों का आरोप था कि सरकार शिक्षण संस्थानों को टारगेट कर ,छात्र छात्राओं का भविष्य खराब करने पर तुली हुई है ,वैसे तो बीते वर्ष भी बंद रहने के कारण छात्रों का भविष्य वैसे ही अंधकारमय हो गया ,इस वर्ष भी जब शिक्षण संस्थान खुले तो फिर से बंद करने का फरमान सरकार की गलत नीति का परिचय दे रहा है ,बंद होने के कारण शिक्षा पूरी तरह चौपट हो जाएगी ,सरकार बंद करने के आदेश को अभिलंब वापस ले नहीं तो सरकार के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा हो जाएगा ,मौके पर नगर मंत्री, विनायक रंजन ,अभिषेक पटेल, संतोष कुमार ,प्रियंक श्रीवास्तव, प्रिंस कुमार प्रीति प्रताप ,निखिल कुमार ,दीपक शरण ,अनुराग श्रीवास्तव, विशाल झा आदि मौजूद रहे, वहीं इसके विरोध में, नौतन प्रखंड के वरिष्ठ समाजसेवी, पुण्य देव प्रसाद ने भी इस संबंध में कहां की अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए राजनीतिक दल से जुड़े राजनेता चुनाव में, लाखों लाख के बीच रैली कर रहे हैं ,तब उन्हें इस महामारी की फैलने की चिंता नहीं है और जिससे देश का भविष्य बनता है, वैसे शिक्षण संस्थानों को बंद किया जा रहा है ,जो सरकार की तानाशाही रवैया का परिचय देता है।

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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