केविवि में भारत विद्या केंद्र एवं रासेयो द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित

केविवि में भारत विद्या केंद्र एवं रासेयो द्वारा राष्ट्रीय युवा दिवस पर कार्यक्रम आयोजित

प्रमोद कुमार

मोतिहारी  :   महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के भारत विद्या केंद्र एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्कूल स्थित चाणक्य परिसर के संकुल सभागार में मंगलवार को स्वामी विवेकानंद जयंती पर राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष माननीय कुलपति एवं अन्य अतिथियों के दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना, मंगलाचरण एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में माननीय कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत सरकार एवं विश्वविद्यालय के आकांक्षाओं के अनुरूप स्वामी विवेकानंद जी को याद किया गया जो अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्वामी जी सामाजिक कुरूतियों के विरुद्ध थे। वह इस मामले में अंबेडकर से भी अग्रणी है। 39 वर्ष की आयु के स्वामी जी की वैचारिकी अद्भुत थी। वह यायावरी प्रवृति के थे जो जिस पक्ष से भी उन्हें समझ सकते है। आधुनिक विश्व को धार्मिक आख्यान से आगे सामाजिक और सांस्कृतिक आख्यान की देन स्वामी जी अद्भुत है जिसे उन्होंने आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनसे हमें सदैव प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. बृजेश कुमार शुक्ल, अधिष्ठाता, मानविकी संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी भारत ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव जाति के प्रेरणा के स्रोत है। मात्र तीस वर्ष की उम्र में 1893 में जो उन्होंने विश्व धर्म सम्मेलन के माध्यम से सनातन धर्म के
विभिन्न आयामों को रखा वह अद्भुत था। उन्होंने विश्व पटल पर भारत के सनातन की पहचान दिलाई। वे मानते थे कि जो भी कर्म किया जाता है उसका भोग करना ही पड़ता है इसलिए सत्कर्म को सदैव अपने साथ लेकर चलना चाहिए।

वेदांत का निदर्शन स्वामी विवेकानंद ने किया जिसमें समदृष्टि को उन्होंने सर्वोपरि रखा। प्रो. शुक्ल ने कहा कि स्वामी जी ने शिकागो में शून्य पर बोलते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन और मरण के समय शुन्यत्व प्राप्त होता है लेकिन जब जीवन के विविध उपांगों से शून्य का मिलन होता है तो उसमें गुणात्मक वृद्धि होती है।विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्ता मा. रामदत्त चक्रधर, क्षेत्र प्रचारक, उत्तर पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने राष्ट्रीय युवा को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी युवाओं के प्ररेणा पुंज थे। अनेक प्रकार की प्रतिकूलताओं के बावजूद भी भारत ने दुनिया को समय-समय पर मार्गदर्शित किया। स्वामी जी के जीवन के बहुत सारे पहलू है। वह अदम्य साहसी और बाल्यकाल से निर्भीक और जिज्ञाषु थे।

स्वामी जी कहते थे कि यदि किसी के जीवन में एकाग्रता नहीं आएगी तो उसका जीवन सफल नहीं होगा। युवा उम्र से नहीं बल्कि मन से पहचाना जाता है। नर सेवा नारायण सेवा को उन्होंने जीवन में उतारा और सम्पूर्ण को इसका पाठ पढ़ाया।कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि डॉ. पंकज कुमार मिश्र, सह आचार्य, संस्कृत विभाग, सेंट स्टीफेंस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अतिति का अवलोकन कर भविष्य का चिंतन स्वामी जी ने दिया और चरैवेति-चरैवेति का मंत्र दिया। स्वामी जी का चिंतन गुरुओं के प्रति, जन-जन, कण-कण सहित सम्पूर्ण के प्रति अद्भुत था। वह सीमा से परे थे और उनके विचार भी। उनका चिंतन किसी वाद से संपृक्त नहीं था। स्वामी जी का धर्म के प्रति अगाध श्रद्धा थी। धर्म हमें एकता के सूत्र में पिरोता है। आज विश्व की सभी समस्याओं का समाधान संवाद से किया जा रहा है जिसके स्वामी जी प्रबल पक्षधर थे।कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत भारत विद्या केंद्र के समन्वयक एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने कुलपति जी को अंगवस्त्रम प्रदान कर एवं संबोधन से किया। धन्यवाद ज्ञापन आयोजन समिति के सदस्य डॉ. अनिल प्रताप गिरी एवं संचालन डॉ. विश्वेश वाग्मी ने किया।राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्रम में संरक्षण मण्डल के प्रमुख प्रति कुलपति प्रो. जी. गोपाल रेड्डी, प्रो. राजीव कुमार, प्रो. आनंद प्रकाश, प्रो. पवनेश कुमार, प्रो. राजेन्द्र सिंह, प्रो. विकास पारीक, प्रो. त्रिलोचन शर्मा एवं प्रो. सुनील महावर का सहयोग प्राप्त हुआ।कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति के प्रो. विजय कुमार शर्मा, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. अनिल प्रताप गिरी, डॉ. जुगल किशोर दाधीच, डॉ. कुंदन किशोर रजक, डॉ.. विश्वेश वाग्मी, डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र एवं श्री विश्वजीत वर्मन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक प्रो. राजेन्द्र सिंह, प्रो. परनवीर सिंह प्रो. अन्तरत्रण पाल, डॉ. श्याम कुमार झा, डॉ. बबलू पाल, पीआरओ शेफालिका मिश्र सहित शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय उपस्थिति रही। कार्यक्रम ऑफलाइन एवं गूगल मिट से ऑनलाइन दोनों मोड में सम्पन्न हुई।

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