जनसंख्या नियंत्रण में सभी का योगदान जरूरी

जनसंख्या नियंत्रण में सभी का योगदान जरूरी

शिवहर।
विश्व जनसंख्या नियंत्रण पखवाड़ा दिवस की सफलता को लेकर शुक्रवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, तरियानी में परिवार नियोजन मेला का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी संजय कुमार ने किया। उद्घाटन के उपरांत बढ़ती हुई जनसंख्या पर चिंता जताते हुए डॉ कुमार ने कहा कि हमारे विकास में जनसंख्या वृद्धि सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़ा है। उन्होंने कहा कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में फैमिली प्लानिंग के महत्व एवं विभिन्न उपायों के व्यापक प्रचार प्रसार की आवश्यकता है। लोग परिवार नियोजन के विभिन्न उपायों के बारे में चर्चा करने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने लोगों से स्थाई एवं अस्थाई उपायों को अपनाने का आह्वान किया।उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए कर्मियों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि इस दौरान महिला बन्ध्याकरण व पुरुष नसबंदी पर विस्तृत चर्चा की गई। मेला में परिवार नियोजन के लिए स्थाई व अस्थाई नियोजन की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि महिला बन्ध्याकरण व पुरुष नसबंदी एक स्थायी नियोजन है। जबकि अस्थाई नियोजन के लिए माला-डी, अंतरा, सुई, कॉपर-टी आदि शामिल हैं। इस दौरान परिवार नियोजन के लिए अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को जागरूक करने के लिए आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी सेविका को निर्देश दिया गया। ताकि लोग स्थाई व अस्थाई परिवार नियोजन को समझ सके।लेख प्रबंधक सह कोविड 19 पर्यवेक्षक राजीव कुमार चौबे ने बताया कि परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा के तहत आशा एवं एएनएम के द्वारा डोर टू डोर परिवार नियोजन से संबंधित जानकारियां लोगों तक पहुंचाई जा रही है एवं उन्हें फैमिली किट मुफ्त में उपलब्ध करवाया जा रहा है । इसके साथ ही पुरुषों की नसबंदी के ऊपर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए गांव-गांव में माइकिंग की जा रही है। इस अवसर पर केयर इंडिया के ब्लाक मैनेजर दीपू श्रीवास्तव, हेल्थ मैनेजर दीपनारायण कुमार आदि उपस्थित रहे।

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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