22 मार्च के एक दिवसीय बंदी जनता कर्फ्यू वैज्ञानिक एवं अध्यात्मिक दोनों

22 मार्च के एक दिवसीय बंदी जनता कर्फ्यू वैज्ञानिक एवं अध्यात्मिक दोनों

सत्येन्द्र कुमार शर्मा,

22 मार्च 2020 का जनता कर्फ्यू का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक अर्थ – अत्यंत सूझबूझ का परिचायक भी है।
प्रधानमंत्री के साथ खड़े भारत के वैज्ञानिकों एवं अध्यात्मिक चिंतकों द्वारा 22 मार्च 2020 को घोषित जनता कर्फ्यू, कोरोना वायरस के विरुद्ध एक अत्यंत ही सूझबूझ भरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक सरल एवं कारगर कदम है।

अब इस बारे में समझने की कोशिश के साथ इस कदम को शत प्रतिशत (100% प्रतिशत ) सफल बनाने का समय है।न केवल साथ देंगे बल्कि जब पूरे मन से और पूरे उत्साह के साथ सभी लोग अमल करेंगें तो अविश्वसनीय परिणाम सामने आना तैय है।

आइए इसको एक बार समझने की कोशिश करते हैं।

कोरोनावायरस का आयु:—-

अब आप संचार माध्यम से जानते है कि कोरोना वायरस की उम्र या आयु अलग अलग परिस्थितियों में कितनी देर होती है। कोरोना वायरस अलग अलग परिस्थितियों में 3 से 72 घण्टे तक सक्रिय रह सकता है यानि कि उसकी उम्र इतनी ही है, वो भी अधिकतम 72 घण्टे तक, लेकिन ज़्यादातर 36 घण्टे में ये समाप्त हो जाता है।

अब अगर सरकार पूरे देश को क्वारंटाइन करना चाहे या आइसोलेशन वार्ड में एडमिट करना चाहे तो ये नामुमकिन है, बिल्कुल नही। इसलिए बहुत समझदारी से प्रधानमंत्री और उनके सलाहकारों ने रविवार यानी वायुमंडल में अवस्थित सूर्य का दिन चुना गया है और जिस दिन सभी देशवासियों को घर पर रोकना आसान भी होगा। रविवार का अलग महत्व भारत के अध्यात्मिक क्षेत्र में मान्य रहा है और है।

गौर से समझे कर्फ्यू के वैज्ञानिक पहलू

अब इसे गौर से समझे जब हमें 22 तारीख को सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक जनता कर्फ्यू के रूप में घर पर रहने के लिए कहा गया है वो भी रविवार को छुट्टी वाले दिन तो इसका साफ मतलब है कि पूरे देशवासियों को 36 घंटे तक क्वारंटाइन में रहने के लिए एक समझदारी भरे निवेदन बेझिझक मनाना। क्योंकि हम सब 21 मार्च की शाम या रात से अपने घर आ जाएंगे और पूरी रात घर पर ही रहेगें जो की जाहिर छोटी सी बात ही तो है, फिर अगले दिन जब सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की वजह से घर पर रहेंगे और फिर उसके बाद फिर घर पर ही सो जाएंगे तो 23 मार्च सुबह जाग कर उठेंगे। इसका मतलब की 21 मार्च की रात से 23 मार्च की सुबह तक जब हम घर पर ही रहेंगे तो 36 घण्टे का हम अपने आप को घर में क्वारंटाइन निवास ही करेंगे। यानी कि कोरोना वायरस अगर कही है तो उसे, 36 घँटे के इस क्वारंटाइन वास या आइसोलेशन वार्ड जैसी स्थिति के चलते पनपने का माध्यम नही मिलेगा और वो लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच जायेगा। इस प्रकार से पूरा भारत एक वैज्ञानिक एवं अध्यात्मिक प्रयोग के माध्यम से कोरोना को हरा सकने की सशक्त स्थिति में आ जाएगा।
दूसरी तरफ जब शाम को 5 बजे, जब लोग अपनी खिड़की या दरवाजे पर खड़े होकर 5 मिनट तक थाली या ताली बजाकर उन लोगो को धन्यवाद देंगे तो ये भी एक आध्यात्मिक प्रयोग ही तो है जिसके माध्यम से प्राणाकर्षण करके कोरोना से लड़ने वालो को सशक्त व सम्बल प्रदान किया जाएगा। अंग्रेजी में इसे लॉ ऑफ एट्रेक्शन अर्थात आकर्षण का सिद्धांत भी कहते हैं।

सरकार, वैज्ञानिकों, चिंतकों का सुत्र

इस प्रकार प्रधानमंत्री एवं सरकार अभूतपूर्व सूझबूझ से कोरोना वायरस का जड़मूल से नाश करने का आग्रह कर रही है। इस योजना को समझने और क्रियान्वयन करने की महती आवश्यकता है।

हम सब सावधान रहें और जागरूकता के साथ कदम बढ़ाते हुए इस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक योजना को समर्थन देते हुए इसका क्रियान्वयन में दिल से सहयोग दें।

Next Post

गौरैया दिवस पर पेड़ लगाए गोरैया बचाएं अभियान पर कार्यक्रम का हुए आयोजन

Fri Mar 20 , 2020
Share on Facebook Tweet it Pin it गौरैया दिवस पर पेड़ लगाए गोरैया बचाएं अभियान पर कार्यक्रम का हुए आयोजन […]

मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

Quick Links