चुनावी मौसम में शिक्षा पद्धति एवं उससे तैयार बेरोजगारी पर चर्चा

चुनावी मौसम में शिक्षा पद्धति एवं उससे तैयार बेरोजगारी पर चर्चा

सत्येन्द्र कुमार शर्मा

रविवार 27 सितंबर :  भारतीय लोकतंत्र में शैक्षणिक पद्धति से उत्पन्न बढ़ती बेरोज़गारी के कारणों पर एक नज़र डालें।
किसी बेरोज़गार से सवाल
1. मजदूरी करोगे….?
– नहीं
2. दुकान पर काम करोगे..?
– नहीं
3. बाइक / कार का काम जानते हो..?
– नहीं
4. बिजली मैकेनिक बनोगे…?
– नहीं
5. पेंटिंग का काम आता है..?
– नहीं
6. मिठाई बनाना जानते हो…?
– नहीं
7. प्राइवेट कंपनी में काम करोगे?
– नहीं…
8. मूर्तियां, मटके, हस्तशिल्प वगैरह कुछ बनाना आता है?
– नहीं.
9. तुम्हारे पिता की ज़मीन है?
– हाँ.
10. तो खेती करोगे ?
– नहीं!!!!

ऐसे 10 – 20 प्रश्न और पूछ लो जैसे – सब्ज़ी बेचोगे ? फ़ेरी लगाओगे? प्लम्बर, बढ़ई / तरखान, माली / बागवान, आदि का काम सीखोगे ??
– सब का जवाब ना में ही मिलेगा।।

फिर पूछो…
11. भैया किसी कला मे निपुण तो होगे…?
– नहीं।। पर मैं B. A. पास हूँ , M.A. पास हूँ I
डिग्री है मेरे पास।।
12. बहुत अच्छी बात है पर कुछ काम जानते हो ? कुछ तो काम आता होगा सैकड़ों की संख्या में काम है ?
– नहीं. काम तो कुछ नहीं आता I

बताओ अब ऐसे युवा बेरोज़गार सिर्फ हमारे ही देश में ही पाए जाते हैं एक सवालिया निशान शिक्षा पद्धति पर खड़ा कर देना वाजिब है।
हमारे भारतीय युवा दिखावे की जिंदगी जीने के आदी हो गये है l यहां सबको कुर्सी वाली नौकरी चाहिए जिसमें कोई काम भी ना करना पड़े l ऐसा युवा सच में देश के लिए अभिशाप ही है l जहां अपनी आजीविका के लिए भी काम करने से हिचकिचाहट महसूस किया जाता है l
गौरतलब यह कि हमारी शिक्षा प्रणाली हर साल लाखों बच्चों को डिग्री देकर निकलने की ब्यवस्था बहाल कर दिया है । सचाई यह है कि भारतीय युवा के हाथ में काग़ज़ का टुकड़ा होता है हुनर नहीं l जब तक खुद में कुछ हुनर पैदा करके उसको आजीविका अर्जन में प्रयोग में नहीं लाते तब तक ख़ुद को बेरोजगार कहने का हक़ नहीं है किसी को भी l
रही बात सरकारों की ये तो आती रहेंगी जाती रहेंगी कोई भी सरकार 100% सरकारी रोज़गार नहीं दे सकती l देशवासियों, समय रहते भ्रामक दुनिया से निकलने का प्रयत्न करो और अपनी काबिलीयत के अनुसार काम करना शुरू करो l अन्यथा जीवन बहुत मुश्किलों से भरा पड़ा है।
जापान और चाइना जैसे देशों में छोटा सा बच्चा अपने खर्च के लिए कमाने लग जाता है l और हम यहां 25-26 साल का युवा वर्ग केवल सरकारों की आलोचना करके समय की बर्बादी कर रहे होते है जिससे कुछ नहीं होने वाला। कितने भी आंदोलन कर लीजिए किसी सरकार को कुछ फर्क़ नहीं पड़ने वाला l अंततः परिश्रम अपने आप को ही करना पड़ता है l
किस्मत रही तो आपको भी जरूर सरकारी नौकरी मिलेगी l लेकिन सिर्फ इसके भरोसे मत बैठो l
इस तरह की बातें सोशल मीडिया पर भी छाए हुए हैं।

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