पांच दिवसीय सार्वजनिक नीति विमर्श 2020 का हुआ आयोजन

पांच दिवसीय सार्वजनिक नीति विमर्श 2020 का हुआ आयोजन

प्रमोद कुमार
मोतिहारीlपु०च०
स्वामी विवेकानंद सीरीज के अंतर्गत चिंतनशील संवाद आत्म निर्भर भारत के द्वितीय चरण में शैक्षिक अध्ययन विभाग महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार , शिक्षाशास्त्र विभाग उत्तर पूर्वीय पर्वतीय विश्वविद्यालय(NEHU) मेघालय तथा शिक्षा विद्यापीठ केन्द्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु के संयुक्त तत्वाधान में पांच दिवसीय सार्वजनिक नीति विमर्श – 2020 का आयोजन किया गया है।कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस मंगलवार को “पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरण नीतियां: सार्वजनिक नीति विमर्श ” उपविषय कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम समन्यक डॉ मुकेश कुमार के अतिथि स्वागत परिचय से हुआ। कार्यक्रम के पहले विषय विशेषज्ञ प्रो०के०पुरूषोत्तम रेड्डी (उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद) का सानिध्य प्राप्त हुआ , उन्होंने कहा कि , 1972 स्टॉकहोम सम्मेलन ने भारत सरकार का ध्यान पर्यावरण संरक्षण की ओर खींचा। 1976 मे दो महत्वपूर्ण अनुच्छेद 48 व 51 A (G) आया। जिसमे व्यक्ति को प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा तथा सभी जीव धारियों के प्रति दयालुता दिखाने की अपील की गई । दूसरे विशेषज्ञ प्रो०अरविंद कुमार झा (संकायाध्यक्ष, शिक्षाविद्यापीठ) बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ का उदबोधन पर्यावरणीय नैतिकता पर था जिसमे उन्होंने कहा कि व्यक्ति को पर्यावरणीय संसाधनों का विवेक पूर्ण इस्तेमाल करना चाहिए जिससे वर्तमान के साथ भविष्य के पीढ़ियों की जरूरत पूरी हो सके। तीसरे विशेषज्ञ के रूप में प्रो०ओम प्रकाश सिंह (पर्यावरणीय विभाग ,उत्तर पूर्वी पर्वतीय विश्वविद्यालय मेघालय ) ने कहा कि पृथ्वी पर मानव और गैर मानव जीवन दोनों का अंतर्निहित मूल्य होता है । चौथे विशेषज्ञ के रूप में डॉ सुदेशना लहरी (शिक्षाशास्त्र विभाग कलकत्ता विश्वविद्यालय) ने अपने उदबोधन में कहा कि राष्ट्रीय पर्यावरण नीति , समाज के सभी वर्गों तक पर्यावरणीय संसाधनों एवं गुणवत्ता की एक समान पहुच सुनिश्चित करना ,जिनकी आजीविका पर्यावरण पर निर्भर हैlअंतिम विशेषज्ञ के रूप में डॉ वी०नित्या सिंडिकेट मेम्बर (भारतीय दर्शन विश्वविद्यालय तमिलनाडु) ने कहा कि वैचारिक परिवर्तन इस प्रकार होना चाहिए जो मुख्य रूप से बढ़ते हुए उच्च जीवन स्तर के विपरीत जीवन की गुणवत्ता का समर्थन करता हो । कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ गीतम छेत्री तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ कानिका दास ने किया । इस मौके पर प्रो० आशीष श्रीवास्तव (संकायाध्यक्ष शिक्षाविद्यापीठ मोतिहारी बिहार) ,डॉ मनीषा रानी,डॉ रश्मि श्रीवास्तव, डॉ पैथलोथ ओमकार तथा शोधार्थी रंजन, अंगद सिंह, इंदुबाला, गणेश शुक्ल, मनीष, रंजय पटेल, अलोकिता विशाल, सविता , सुनील दुबे, विद्यार्थी नवीन, अंकिता, नूतन, तूलिका, कंचन, संजीव आदि तकनीकी माध्यमों से जुड़े हुए थे ।

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“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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