गौतम बुद्ध राजसिंहासन छोड़ संन्यास योगी आदित्यनाथ सन्यासी चोला छोड़ राजसिंहासन जमीनी हकीकत

गौतम बुद्ध राजसिंहासन छोड़ संन्यास योगी आदित्यनाथ सन्यासी चोला छोड़ राजसिंहासन जमीनी हकीकत

सत्येन्द्र कुमार शर्मा

सोमवार 12 अक्टूबर : राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव के मौके पर एक नई पहचान सामने आने लगा है। एक भी राजनीतिक पार्टी के जमीन से जुड़े कार्यकर्ता द्वारा पार्टी का झंडा ढ़ोने और आलाकमान के निर्देश का पालन करना किया जाता रहा लेकिन परिणाम टिकट से बंचित होते ही आलाकमान के दागी चेहरों को जनमानस के सामने रख देना और जनमानस द्वारा उन दागी बातों को धुआं धार प्रचार प्रसार करना आज आम बात हो गया है। किसी ने लिखा है कि “कोई बुरा प्रत्याशी केवल इसीलिए आपका मत पाने का दावा नही कर सकता कि वह किसी अच्छे दल की ओर से खडा हैं. दल के ‘हाईकमान’ ने ऐसे व्यक्ति को टिकट देते समय पक्षपात किया होगा . अतः ऐसी गलती को सुधारना मतदाता का कर्तव्य हैं .” – प. दीनदयाल उपाध्याय जैसे महान समाजसेवी के बातों को याद दिलाते हुए कहा है कि दिग्विजय रथ का चलना भी कभी राजा के मन मे अहंकार का बीज रोप देता है।
भाजपा का ऊपरी छज्जा जो खुद को कैलाश मानसरोवर सा अविजित समझने की भूल कर बैठा है उसे ध्यान रखना चाहिए कि जमीनी कार्यकर्ताओ की अपेक्षा उसे बाबरी की तरह ढाह कर रख देगी।
भाजपा खुद को सत्ता में बनाने के लिए दिन दयाल जी का फोटो लगाकर दलालों सा व्यवहार कर रहा है।
कार्यकर्ता जमीन पर रहकर कोरोना में घर-घर का ध्यान रखे,बाढ़ में लोगों की एकलौती आशा के रूप में काम करें मगर टिकट किसको दी जा रही है “एक ऐसा व्यक्ति जिसने शायद ही अपराध का कोई क्षेत्र छोड़ा होगा,करोड़ो का बैग थमाकर दिन रात विचारधारा को गरियाने वाला आज केवल सत्ता सुख के लिए पार्टी में जा बैठा है”
जो व्यक्ति आज करोड़ो रूपये देकर केवल सत्ता सुख के लिए पार्टी में आ सकता है वो क्या जनता के हितों का ध्यान रखेगा या खुद के लिए पैसे बनाने पर ध्यान रखेगा यक्ष प्रश्न बनता जा रहा है।
अब फैसला अमणौर की जनता को करना होगा कि पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय के लक्ष्य को पूरा करने वाले जननायक शत्रुघ्न तिवारी को आगामी 3 नवम्बर को चुनने के लिए घर से बाहर निकलना है या एक अपराधी छवि के स्वार्थी व्यक्ति को अपना नेता बनाकर 5 साल से चली आ रही विकास की गंगा को रोकने के लिए आपको वोट करना है।
चोकर बाबा की राह आपको विकास तक लेकर जाएगा और मंटू सिंह आपको जंगलराज की तरफ विचारना जनता को है।
फैसला अब आपको करना हैं कि आसन्न चुनाव में मतदान के मर्यादा करने के लिए जमीनी हकीकत उजागर करना है या नहीं।
वहीं बनियापुर विधानसभा क्षेत्र के संबंध में लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े लोगों में शुमार तारकेश्वर सिंह को टिकट से बंचित करने के लिए गठबंधन धर्म की दुहाई दि जा रही है।
दूसरी ओर एक जमीन से जुड़े कार्यकर्ता ने उदगार व्यक्त करते हुए कहा है कि “मेरा भाषण कोई और लिखे और मैं उसे केवल पढ दूं ऐसा सम्भव नहीं “। ऐसा कहकर भारत के महामहिम का पद लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा ठुकरा दिया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण से भारत का राष्ट्रपति बनने की पेशकश की थी। ऐसे महामानव की जयन्ती के मौके पर उन्हें शत शत नमन कर कहा गया है कि देश में और प्रदेश में जयप्रकाश आन्दोलन से निकले हुए अधिकांश नेता सत्ता में हैं । बिहार में तो जयप्रकाशजी के चेला मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री हैं । एक बडा चेला झारखंड में जेल मेंं भी चारा घोटाले के आरोप में बंद है। सुशासन की सरकार में गूंगे बहरों वृद्धों की एक साल से ज्यादा समय की सामाजिक सुरक्षा की पेंशन बन्द है । जयप्रकाश आन्दोलन से जुडे भूमिगत लोगों की पेंशन की फाईल दस वर्षों से उपमुख्यमंत्री के दफ्तर में धूल फांक रही है । एक बात आश्चर्य की यह है कि राज्य के सभी विभागों में सभी कैडर में अधिकांश कर्मचारी पिछले पन्द्रह वर्षों में नालन्दा बाढ़ बिहार शरीफ के लगभग एक ही जाति विशेष के हैं । जरा सोचिए ये इन स्थानों के लडके इस समय ज्यादा पढ़ने लिखने लगे अथवा कोई राजनीतिक प्रभाव का फल है । दारोगा की पिछले बहाली की सूचि का गहन अध्ययन करेंगे तो और बात स्पस्ट हो जाएगी । टिकट बंटवारे में तो उप मुख्यमंत्री बिहार ने कमाल कर दिया । कैलाशपति मिश्रजी ने सुशील मोदी को राजनीति के शिखर पर पहुंचाया । यादव वर्ग को रिझाने के लिए नन्दकिशोर यादव को दो बार प्रदेश अध्यक्ष बनाया वे दस वर्षों से पथ निर्माण मंत्री हैं । इन दोनों ने उषा विद्यार्थी का टिकट काट दिया । उमा पाण्डेय के क्षेत्र को बेंच दिया । चोकर बाबा के क्षेत्र को दो दिन पहले भाजपा में किसी दूसरे को शामिल कराकर चोकर बाबा का टिकट काट दिया । हिम्मत थी तो यह सीट ही जदयू से बेंच देते । तरैया और सोनपुर का हारा हुआ सीट नहीं बेंचते और अमनौर की जीती हुई सीट हीं बेंच दी । इसमें सारण के सांसद की भी अहम भूमिका रही है । गिरिराज सिंह को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए पहले नवादा चुनाव लडने के लिए भेजा गया । वहां से जीतकर पांच वर्षों तक सेवा कर लिए तो 2019 के चुनाव में उनके नहीं चाहने के बाद भी वेगूसराय भेज दिया गया । मढौरा क्षेत्र जदयू को दे दिया गया तो महाराजगंज में उपचुनाव में जीते हुए डां देवरंजन सिंह का टिकट काट दिया गया । बिहार भाजपा का नेतृत्व एक समर्पित वर्ग को मुख्य धारा से अलग थलग करने में लगा है । हमें भी इस साजिश के खिलाफ खड़ा होना होगा अगर हमने ऐसा कर दिया तो लोकनायक जयप्रकाशजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
लेकिन परन्तु के साथ यह भी कहा जा रहा है कि 15 वर्ष के राज काज उब चुके लोगों को न्याय हेतु जेल की सलाखों का दरवाजा भी बंद हो गया है।
आज दिनदयाल उपाध्याय एवं जयप्रकाश नारायण जैसे लोग क्षितिज पर नदारत है।
गौतम बुद्ध राजसिंहासन छोड़ दुनिया के लोगों की सेवा की लेकिन योगी आदित्यनाथ सन्यसी चोला पहन राजसिंहासन संभाल लिया है। ऐसे वक्त में जमीन के हकीकत अब जनता के हाथों में है।

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