आठ वर्ष पूर्व गंडामन धर्मासती के 23 बच्चों की मौत मॉ की सूनी गोद की घाव आज भी ताजा

आठ वर्ष पूर्व गंडामन धर्मासती के 23 बच्चों की मौत मॉ की सूनी गोद की घाव आज भी ताजा

सत्येन्द्र कुमार शर्मा, सारण।
सारण जिले के मशरक प्रखंड के धरमासती गंडामण गांव में सरकारी विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना के जहरीले निवाले से 23 मासूम बच्चों की जिंदगी को देखते ही देखते समाप्त हो गई।
आठ वर्षों पुराना यह घाव बर्बस जिंदा हो जाता है। उन बच्चों के घरों में सुनी मॉ की गोद एक बार हिलोरें मारने लगता है।आस पास के गांव में इसकी चर्चा होने लगती है। गंडामन नवसृजित विद्यालय में जहरीले एमडीएम से 23 बच्चों की मौत की आठवीं बरसी आज 16 जुलाई शुक्रवार को ही है।आठ वर्ष पहले 16 जुलाई 2013 को दर्दनाक घटना ने सबको झकझोड़ कर रख दिया था।मशरक प्रखंड के धरमासती बाजार के पास गंडामन गांव के सामुदायिक भवन में प्राथमिक विद्यालय के मिड डे मील खाने से एकाएक 23 छोटे-छोटे बच्चों की अचानक असामयिक मौत हो गर्इ।

घटना के संबंध में

हुआ यूं कि रोज की तरह 16 जुलाई 2013 को प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई कर रहे मासूम बच्चे खाना मिलने का इंतजार कर रहे थे। उधर रसोइया ने तेल खत्म होने पर एक बच्चे को स्कूल की प्रधान शिक्षिका मीना देवी के घर से सरसों तेल लाने को भेजा। सरसो तेल के डिब्बे के पास ही गन्ने की फसल में छिड़काव के लिए तैयार कीटनाशक रखा गया था। बच्चे ने तेल के बदले कीटनाशक का घोल लाकर रसोइया को दे दिया, जो कि देखने में बिल्कुल सरसों तेल के जैसा ही था। रसोइया जब सोयाबीन तलने लगी तो उसमें से झाग निकलने लगा तो उसने इसकी शिकायत प्रधानाध्यापिका मीना देवी से की। मीना देवी ने इसे गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। उसके बाद जब खाना बनकर तैयार हो गया और बच्चों को परोसा गया तो बच्चों ने खाने का स्वाद खराब होने की शिकायत की कहते हैं कि बच्चों की शिकायत को भी गंभीरता से नहीं लिया गया उसे नजरअंदाज करते हुए मीना देवी ने डांटकर भगा दिया था। कुछ देर बाद ही बच्चों को उल्टी और दस्त शुरू हो गया। इसके बाद देखते ही देखते 23 बच्चों ने दम तोड़ दिया। उधर विद्यालय की रसोइया और 25 बच्चे पीएमसीएच में कठिन इलाज के बाद अपने घर वापस आ पाये थे।

मामले की प्राथमिकी में प्रधानाध्यापिका नामजद अभियुक्त

23 बच्चों की मौत को लेकर मशरक थाने में उस समय एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई। उसमें प्रधान शिक्षिका मीना देवी समेत उनके पति अर्जुन राय को भी आरोपित किया गया। मीना देवी को एसआइटी में शामिल महिला थानाध्यक्ष अमिता सिंह ने 23 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया। बाद में कोर्ट ने पति अर्जुन राय को बरी कर दिया। लेकिन प्रधान शिक्षिका को दोषी मानते हुए दो सजा सुनाई गई है। पहली सजा में 10 वर्ष की सश्रम कैद एवं ढाई लाख जुर्माना, दूसरी सजा में सात वर्ष सश्रम कैद एवं 1.25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने कहा था कि दोनों सजा अलग-अलग चलेगी। पहले 10 वर्ष की सजा और बाद में 7 वर्ष की सजा काटनी होगी। फिलहाल मीना देवी जमानत पर बाहर हैं।

बच्चों की मौत के बाद सरकार ने गंडामन गांव को गोद ले लिया था। इसके बाद गांव के विकास को पंख लग गए। जिस स्कूल में घटना हुई उसका नया बिल्डिग बना और उसे अपग्रेड किया गया। मृत बच्चों की याद में लाखो रूपए की लागत से स्मारक, इंटर कॉलेज की स्थापना, स्वास्थ्य उपकेंद्र, जल मीनार बनी। गांव की अधिकांश सड़कों को चकाचक कर दिया गया। पूरे गांव में बिजली की व्यवस्था, पीड़ित परिवारों सहित गांव के अन्य लोगों को भी पक्का आवास, पेंशन योजना, परिसर में पोखरे का उन्नयन आदि अनेक विकास योजनाओं को साकार कर दिया गया। हालांकि कई योजनाएं अब भी अधूरी हैं।वही पोखर पर गांव के ही दबंगों का कब्जा है

16 जुलाई को यादें ताजा चर्चा

गंडामन गांव में जिन घरों के चिराग बूझ गए, उनके घर एक बार फिर आज की तारीख में मातम का दौर शुरू हो जाता है। इस हृदय-विदारक घटना की यादें ताजा होते ही गांव के हर लोगों की आंखें नम हो जाती है। विद्यालय के पोषित क्षेत्र के करीब-करीब हर दूसरे घर के बच्चे को इस घटना ने लील लिया।16 जुलाई शुक्रवार को जब घटना की आठवी बरसी है लोग बच्चों के स्मारक पर एक बार फिर एकत्र होंगे। फूल-माला चढ़ा कर अब कभी नहीं लौटने वाले अपने लाडले को प्यार-दुलार देकर श्रद्धांजलि देकर असह्य दर्द को झेलने को मजबूर हो जाते हैं।

दर्दनाक दास्तां के संबंध में
अनूप नारायण सिंह के शब्दों में जहरीला मिड डे मील खाकर अपनी जान गवाने वाले बच्चे आपको याद होंगे।बिहार के सारण जिले के मशरख प्रखंड के गंडामन धर्मासती में आज ही के दिन आठ वर्ष पूर्व हुआ दर्दनाक हादसा हुआ था जिसका दर्द आज भी ताजा है मसरख उनका गृह प्रखंड है और घटना वाला गांव मेरे गांव से चंद किलोमीटर की दूरी पर है इस कारण से उस गांव की सिसकियां आज भी आते जाते लोगों के कानों में अक्सर टकरा ही जाती है। ” वर्ष गुजर गए पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार भी पीड़ित लोगों के आंसू पोछने नहीं पहुंचे आज भी गांव वालों को मुख्यमंत्री के आने की प्रतीक्षा है।”

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