किसान रैली में घटनाओं की बौछार,22 प्राथमिकी दर्ज,200 उपद्रव्यों को हिरासत में लिया गया

किसान रैली में घटनाओं की बौछार,22 प्राथमिकी दर्ज,200 उपद्रव्यों को हिरासत में लिया गया

शाहबुद्दीन अहमद

बेतिया  :   72 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर ,किसान संगठनों के द्वारा निकाली गई ट्रैक्टर रैली में, घटनाओं की बौछार हो गई है, इससे संबंधित 22 प्राथमिकी दर्ज की गई है , साथ ही 200 लोगों को हिरासत में लेकर उन पर डकैती का मुकदमा दर्ज किया गया है, किसान नेताओं ने इस घटना से अपने आपको अलग कर लिया है ,और घटना पर निंदा भी की है, मगर इस तरह की घटना होना भारतवर्ष के इतिहास में यह पहली बार है,ऐतिहासिक लाल किला पर चढकर किसान आंदोलन से संबंधित संगठनों का झंडा फहराना अशोभनीय घटना है,

इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम होगी, किसान आंदोलन के नेताओं के द्वारा इस तरह से, गणतंत्र दिवस के अवसर पर लाल किले पर चढ़कर जिस तरह किसान संगठन का झंडा को ऊपर ले जाकर गाड देना और उस पर खुशी का इजहार करना भारतवर्ष के संविधान की खुल्लम खुल्ला उल्लंघन है, किसान आंदोलन के युवकों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर जिस तरह कानून का उल्लंघन किया और साथ में सरकारी गाड़ियों ,कार्यालयों व लाल किले के अंदर घुस कर ,जिस तरह तोड़फोड़ की है, वह अपने आप में एक चुनौती बन गई है , इस घटना में 300 से अधिक पुलिसकर्मी व इतना ही नाग्रिक बुरी तरह चोटिल हो गए हैं,पता चला है कि डीसीपी रेंक के एक पदाधिकारी पर तलवार से हमला भी किया गया, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इन घायलों को आंका जा सकता है, जिनका इलाज सरकारी अस्पताल में चल रहा है,इतना ही नहीं, पुलिस कर्मियों की मृत्यु की भी सूचना विश्वसनीय सूत्रों से मिल रही है, लगता है कि यह पूर्व नियोजित एवं पूर्वाग्रह से ग्रसित घटना लगती है, सरकार ने किस परिस्थिति में गणतंत्र दिवस के अवसर पर,किसान संगठनों को ट्रैक्टर रैली निकालने की अनुमति दी,यह समझ से परे की बात है, अगर अनुमति दे दी भी गई थी तो पुलिस प्रशासन को चौकसी रखनी चाहिए थी,अपने सभी तरह के अस्त्र शास्त्र से लैस होकर ड्यूटी करनी चाहिए थी, किसी तरह की घटना होने पर इससे अच्छी तरीका से निपटा जा सके, मगर पुलिस प्रशासन ठीक से चौकसी नहीं बरती, जिससे इस तरह की घटना सामने आई, इस घटना से भारतीय इतिहास में, गणतंत्र दिवस के दिन का एक कलंक का टीका लग गया, जो रहती दुनिया तक इस कलंक के टीके को मिटाया नहीं जा सकता है। विश्वसनीय सूत्रों से , व समाचार के माध्यम से यह पता लग रहा है, पुलिसअपनी जांच में क्या रिपोर्ट देती है, और इस की सत्यता कितना सही और दुरुस्त निकलता है, यह जांच रिपोर्ट से ही पता चल पाएगा।
सरकार ने किसान आंदोलन को समाप्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और इसके बदले कई दौर की बातचीत चलने के बाद भी कोई खास नतीजा नहीं निकला।

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