स्वतंत्र्यवीर मंगल पांडेय के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव के अन्तर्गत भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम वेब संगोष्ठी

स्वतंत्र्यवीर मंगल पांडेय के जन्मदिन के उपलक्ष्य पर आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव के अन्तर्गत भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम वेब संगोष्ठी

 

मोतिहारी।पु.च
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, जनसम्पर्क प्रकोष्ठ एवं लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में पंडित मदन मोहन मालवीय स्कूल ऑफ कामर्स एवं प्रबंध विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित वेब संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ संजीव कुमार शर्मा और प्रति कुलपति प्रोफेसर जी गोपाल रेड्डी के संरक्षण और अध्क्षता में आयोजित किया गया। संगोष्ठी में आमंत्रित मुख्य अतिथि प्रो. योगेन्द्र सिंह ( पूर्व कुलपति-, जननायक चन्द्रषंखर विश्वविद्यालय बलिया एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, महात्मागांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी) ने उद्बोधन में कहा क्रान्तिकारी भूमि बागी बलिया के बगावत की गाथा विश्ववप्रसिद्ध है। इस धरती के शौर्यवीर और क्रान्तिकारी शहीद मंगल पांडे ने भारत के प्रथम स्वतंत्रा संग्राम के आन्दोलन की लड़ाई लड़ी जो 1857 के विद्रोह एवं भारत की स्वतंत्रता का ऐतिहासिक विजय गाथा है। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा भारतीय राष्ट्रवादी इतिहासकर लेखन प्रकाशन का अंग विनायक दामोदर वीर सावरकर ने अंग्रेजो के विद्रोह की गाथा 1909 में लिखा जिसमें उन्होनें कहा भारतीय स्वाधीनता संघर्ष, एवं स्वराज के लिए लड़ा गया संघर्ष है जो भारतवासियों को राष्ट्र गौरव सीखने की प्रेरणा देता है। संगोष्ठी में आमंत्रित विषिष्ट अतिथि एवं मुख्य वक्त षतरुद्र प्रताप (सदस्य, निदेशक मंडल, नेहरू युवा केन्द्र संगठन) ने उद्बोधन में विनायक दामोदर स्वतंत्र्यवीर सावरकर के लंडन के कार्यकाल में ब्रिटिश लाइब्रेरी के दस्तावेज द्वारा लिखित पुस्तक के मध्यम से 1957 के गदर के ब्रिटिश हुकुमत के षणयंत्र और सबूत को बताया। उन्होनें कहा सरदार भगत सिंह उस पुस्तक की प्रतियां क्रान्तिकारियों में बांटे जिससे क्रान्तिकारियों में अंग्रेजो के भारत के प्रति काली षणयंत्र का पता चला। उन्होनें कहा यह स्वीकार करना चाहिए, वर्तमान भारत का निर्माण केवल नेतृत्व एवं राजनीतिक विषेषज्ञों से ही नहीं वरन् उन क्रान्तिकारियों, शौर्य वीरों और इतिहासकारों का भी योगदान है जिनकी गाथायें गायी नही गई, जिन्होनें स्वतंत्र भारत की पृष्ठभूमि बनाई। अपने व्यख्यान के अन्त में उन्होनें सभी अतिथियों का आभार प्रकट करते हुए संगोष्ठी आयोजन की प्रशंसा की और पंडित मदन मोहन मालवीय प्रबंधन विज्ञान विभाग को सफल कार्यक्रम के लिए सराहना व्यक्त की और उन्होंने कहा भविष्य में ऐसे कार्यक्रम होते रहें। संगोष्ठी कार्यक्रम के संयोजक एवं संचालक, पंडित मदन मोहन मालवीय स्कूल ऑफ कामर्स एवं प्रबंध विज्ञान के डीन प्रोफेसर पवनेश कुमार ने अपने उद्बोधन में स्वतंत्र्यवीर मंगल पांडेय के पराक्रम एवं शौर्य की गाथा को विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पढ़ने और जानने को आवश्यक बताया जिससे कि वे अपने जीवन में उत्साह एवं जोश को बनाये रखेंगे। सह संचालक डॉ अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने आमंत्रित सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस वेब संगोष्ठी में प्रोफेसर सुधीर कुमार साहू, डॉ सपना सुगंधा, डॉ अलका ललहाल, डॉ स्वाति कुमारी, श्री कमलेष कुमार, श्री अरूण कुमार तथा 100 से ज्यादा विद्यार्थी, शोधार्थीयों ने भाग लिया।

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“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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