पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का हुआ आयोजन

 

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में अंतरराष्ट्रीय वेब संगोष्ठी का हुआ आयोजनप

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान प्रोफेशन के मूलभूत सिद्धांतों एवं दर्शन को समझने की जरूरत

प्रमोद कुमार

मोतिहारी  :  महात्मा गांधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी , बिहार के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन किया गया। ‘पुस्तकालय एवम् सूचना विज्ञान शिक्षा पर अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण’ विषयक इस इस वेबीनार का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार शर्मा ने सबको शुभकामनाएं दी। अपने उद्बोधन में प्रो. शर्मा ने अकादमिक क्षेत्रों में नवाचार के लिए पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान की महत्ता पर प्रकाश डाला।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर रोशन लाल रैना, कुलपति जेके लक्ष्मीपत विश्वविद्यालय जयपुर ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विषय के पाठ्यक्रम को उच्च कोटि के सूचना सेवा को प्रदान करने के लिए उन सभी विषयों को सम्मिलित किया जाना चाहिए जिससे पुस्तकालय प्रोफेशनल्स उच्च कोटि के सूचना से सूचना उपयोगकर्ता को समृद्ध कर सकें। इस प्रोफेशन कि मूलभूत सिद्धांतों और दर्शन को समझना होगा। पाठयक्रमों में उन्नत सूचना तकनीकों, संचार कौशल को तार्किक ढंग से सोच विकसित करने, निर्णय लेने की क्षमता, समस्या समाधान से संबंधित विषयों को समावेशित किया जाना चाहिए। छात्रों को इंटर्शिप प्रोग्राम के लिए प्रेरित करना चाहिए।इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर मोहम्मद शरीफ़ फूल इस्लाम ,पुस्तकालय एवम् सूचना विज्ञान विभाग, यूनिवर्सिटी ऑफ राजशाही बंगलादेश ने बांग्लादेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पुस्तकालय विषय के पाठयक्रमों की चर्चा की और बताया कि इस विषय में विभिन्न अन्य विषयों के साथ भी जोड़ना होगा। सूचना तकनीक और सूचना उपयोगकर्ता के आवश्यकता को ध्यान रखते हुए इसे और प्रासंगिक बनाना होगा।वेब संगोष्ठी कार्यक्रम में विषय प्रवर्तक प्रोफेसर साद बिन सैद अज्ज़हरी , पुस्तकालय एवम् सूचना विज्ञान विभाग, यूनिवर्सिटी रेयाद ने सऊदी अरब के विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों की चर्चा की और बताया कि इस विषय के पाठ्यक्रम में डिजिटल तकनीकों, कम्युनिकेशन स्किल और भाषा को मजबूत करने प्रयासों को और तर्कसंगत और विश्वव्यापी बनाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर जी गोपाल रेड्डी ने की को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व में सदस्य रहे हैं। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में ग्रन्थालय को ज्ञान के खजाने के रूप में उल्लेखित किया और भारतीय प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, तक्षशिला विश्वविद्यालय के ग्रंथालयों की समृद्धता के तरफ सबका ध्यान आकृष्ट किया।कार्यक्रम में शामिल सभी सहभागियों का स्वागत विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठाता प्रोफेसर आनन्द प्रकाश जी ने की।कार्यक्रम के विषय के बारे पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के शोध छात्र श्री शंभू राज उपाध्याय ने विस्तार से बताया और सुश्री रंजना और अनीता शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया। अतिथियों का परिचय डॉक्टर भव नाथ पांडेय, सहायक आचार्य, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग ने कराया और डाॅक्टर मधु पटेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस वेबीनार के निदेशक डॉक्टर रंजीत कुमार चौधरी, प्रोफेसर एवम् विभागाध्यक्ष पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के मार्ग दर्शन में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। वेब संगोष्ठी में विश्व भर से लगभग २००० लोगों ने अपना पंजीकरण कराया और ५० से अधिक देशों से सहभागिता रही जिसमें से अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, सऊदी अरब, बंगलादेश, इराक, भारत के विभिन्न राज्यों से लाईब्रेरी प्रोफेशनल्स ने जीवंत सहभागिता की। इस वेबीनार में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अधिष्ठता, विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर्स, कुलसचिव, सह कुलसचिव, सेक्शन ऑफिसर्स, मीडिया प्रभारी सुश्री शेफलिका मिश्रा एवम् सिस्टम एनालिस्ट श्री दीपक दिनकर जी अटल बिहारी वाजपेई केंद्रीय पुस्तकालय के श्री रॉबिन कुमार ने इस वेविनार के कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय सहभागिता की और विश्वविद्यालय परिवार के सदस्यों का सहयोग एवम् सक्रिय सहभागिता रही।
वेबीनार के संयोजक डॉक्टर भव नाथ पांडेय, डाॅक्टर मधु पटेल एवम् सुश्री सपना देवी , सहायक आचार्य पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान का इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अथक प्रयास किए और पंजीकरण कार्य तथा बाहर के प्रतिभागियों के साथ संवाद करने का सराहनीय कार्य किया।

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“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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