इबादत से ही बरसती है अल्लाह की रहमतें: बेताब रज़ा

इबादत से ही बरसती है अल्लाह की रहमतें: बेताब रज़ा

रोजेदारों के लिए खुदा की सारी मख्लुकात करती है दुआएं

गरीब दर्शन
मोतिहारी।पु0च0

रमजान का पाक महीना हमें गरीबों की मदद करने का मौका देता है। बरकतों वाले इस महीने में इबादत की जाती है। इबादत से ही अल्लाह की रहमतें बरसती है, तो जिन्दगी में सुकून मिलता है। असल में सुकून का नाम ही जन्नत है। जो लोग अल्लाह के बताए रास्ते पर चलते है, औरों के लिए भी मिसाल बनते हैं। ये बाते रूहानी शिफाकाना के हाफिज बेताब रजा असलमी ने कहीं। उन्होने कहा कि रमजान ऐसा महीना है, जो दुनिया में हर इंसान को ईमान की राह दिखाता है। जैसे बुरा न बोलो, बुरा न सुनों और न ही बुरा देखों। रमजान में बुराईयों से बचने की हिदायत है। रोजा बुराईयों से रोकता है। रोजा रखने से रूहानी ताकत बढ़ती है तो दूसरों की तकलीफ का भी पता चलता है। ईमान की मजबूती से हम रोजा रखने के साथ कुरान शरीफ की तिलावत भी करते है। असल दीन यही है। हमारी पहचान बन पाती है। इस महीने मे इफ्तार की भी बड़ी अहमियत है। वही श्री असलमी कहा कि रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखने से सेहत को भी कई फायदे होते है। यही करण है कि लोग मानसिक और शारिरिक रूप से सेहतमंद रहने के लिए रोजा या व्रत करते है वही श्री असलमी ने कहा कि रोजेदारो के लिए खुदा की सारी मख्लुकात दुआएं करती है। यहां तक कि दरिया की मछलियां भी रोजेदार की संहतों सलामती के लिए दुआ करती है। रोजेदार को इफ्तार कराना, शरबत पिलाना, खाना खिलाना वगैरह बहुत ही सवाब का काम है।

Next Post

स्वच्छता को लेकर नगर निगम सक्रिय, छिड़काव जारी

Sat Apr 17 , 2021
Share on Facebook Tweet it Pin it स्वच्छता को लेकर नगर निगम सक्रिय, छिड़काव जारी गरीब दर्शन / प्रमोद कुमार […]

मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

Quick Links