कलर लाइट सिग्नल” से युक्त पूर्वोत्तर बड़ी लाईन रेलवे स्टेशन

“कलर लाइट सिग्नल” से युक्त पूर्वोत्तर बड़ी लाईन रेलवे स्टेशन

सत्येन्द्र कुमार शर्मा,सारण:
पूर्वोत्तर रेलवे के सभी बड़ी लाईन के स्टेशन ‘कलर लाइट सिगनल‘ से युक्त कर दिया गया है।
पूर्वोत्तर रेलवे ने संरक्षित रेल परिवहन सुनिश्चित करने हेतु किये जा रहे प्रयासों की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. पूर्वोत्तर रेलवे के सभी स्टेशनों पर सिगनलिंग प्रणाली की इलेक्ट्रानिक इण्टरलॉकिंग कर दी गयी है तथा स्टेशनों को 25 केवी (एसी) के रेल विद्युतीकरण के अनुकूल उपयुक्त उपकरणों से लैस कर दिया गया है. पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मण्डल में आखिरी बचे एक मात्र मैकेनिकल इण्टरलॉकिंग वाले रामनगर स्टेशन पर इलेक्ट्रानिक इण्टरलॉकिंग की व्यवस्था कर दिये जाने के फलस्वरूप अब पूर्वोत्तर रेलवे पर कोई भी मैकेनिकल इण्टरलॉकिंग व्यवस्था वाला स्टेशन नहीं रह गया है. यह कार्य लक्षित तिथि से पहले ही पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा किया गया है. इस कार्य के पूरा हो जाने से पूर्वोत्तर रेलवे के सभी बड़ी लाईन के स्टेशन ‘कलर लाइट सिगनल‘ से युक्त हो गये. इसी के साथ पुराने लिवर फ्रेम से संचालित होने वाले ‘सेमाफोर सिगनल‘ बड़ी लाईन से पूरी तरह समाप्त हो गये. विदित हो कि गोरखपुर रेलवे स्टेशन का पैनल इण्टरलॉकिंग वर्ष 1984 में हुआ था.
पुरानी सिगनलिंग प्रणाली में यार्ड में अधिकतम गति मात्र 50 किमी प्रति घंटा अनुमेय थी जबकि नये प्रणाली में अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा अनुमेय है. पुरानी व्यवस्था में सिगनलिंग की प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता था तथा ज्यादा मेंटेनेन्स की आवश्यकता थी, जबकि नये सिस्टम में समय भी नहीं लगता है तथा मेंटेनेन्स-फ्री भी है. कलर लाइट सिगनल की रात्रिकालीन दृष्यता भी पुराने सेमाफोर सिगनल की तुलना में बहुत बेहतर है. इण्टरलॉकिंग से संरक्षा के साथ यार्ड में ट्रेनों की गति भी बढ़ती है।

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