गोपाष्टमी के दिन गोविंद की पूजा से उत्तम पुण्य की प्राप्ति:गरिमा 

गोपाष्टमी के दिन गोविंद की पूजा से उत्तम पुण्य की प्राप्ति:गरिमा

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया

नप सभापति, गरिमा देवी सिकारिया ने अपने परिजनों के साथ गोपाष्टमी की विशेष पूजा की,इस उपलक्ष पर, कार्तिक शुक्ल पक्ष की आठवीं तिथि को गोपाष्टमी का त्योहार मनाया जाता है, यह त्योहार गायों की पूजा और प्रार्थना करने के लिए समर्पित होता है। इस दिन गाय माता (गोधन) के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान प्रदर्शित करते हैं। गोपाष्टमी की पूर्व संध्या पर गाय का पूजन करने वाले व्यक्तियों को एक खुशहाल जीवन और अच्छे भाग्य के साथ सुख समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन गाय गुरु और गोविंद की पूजा करने वाले श्रद्धालु के घर में सुख -समृद्धि के साथ धन की वृद्धि होती है। सभापति, सिकारिया ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार यह पर्व गोवर्धन पर्वत से जुड़ा है। भगवान श्री कृष्ण ने गोचर लीला इसी दिन से आरंभ की थी। भगवान श्री कृष्ण ने जब माता से गो सेवा करने की इच्छा व्यक्त की तो माता यशोदा ने उन्हें अनुमति नहीं दी, लेकिन बाल हठ के कारण उन्होंने शांडिल ऋषि से इसका मुहूर्त निकलवाया, मुहूर्त कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी। उसी समय से गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा। हमारे समाज में हर रोज गाय को पहली रोटी खिलाने की परंपरा है, लेकिन गोपाष्टमी के दिन विधि विधान से गो-पूजन का विशेष महत्व है। गोपाष्टमी पर गुरु गोविंद और गाय की पूजा के साथ गौ रक्षक ग्वाला को भी तिलक लगाकर मीठा खिलाया जाता है। वहीं जो बहनें भाई दूज के पर्व पर अपने भाइयों को तिलक नहीं कर पाईं, वह इस दिन अपने भाइयों को तिलक लगतीं हैं।

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

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