पर्व मनाते वक्त दूसरों की भवनाओं का रखें ख्याल – पूर्व इमाम

पर्व मनाते वक्त दूसरों की भवनाओं का रखें ख्याल – पूर्व इमाम

मोतिहारी 20 जुलाई- मुसलमानों के सबसे पवित्र पर्व माना जाने वाले पर्व में बकरीद पर्व को बहुत ही महत्ता दी जाती है। इस दिन ईश्वर को खुश करने के लिए सभी लोगों के तरफ से कुर्बानी अदा की जाती है एवं कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटी जाती है। पहला हिस्सा गरीबों के बीच, दुसरा अपने अजीजों एवं तीसरा खूद के लिए रखा जाता है। उक्त बातों की जानकारी देते हुए बलुआ मस्जिद के पूर्व इमाम मौलान हाफिज मोहम्मद जैनुद्दीन खान ने कहा कि ईद उल अजहा कुर्बानी देते वक्त दूसरे मजहब की भावनाओं का ख्याल रखे जाने की अपील आम जनों से की। उन्होंने कहा कि कुर्बानी खूले में नहीं करना चाहिए । कुर्बानी का फोटों इंटनरेट एवं मीडिया में नही दें। वहीं श्री खान ने कहा कि ईद-उल-अजहा का त्योहार हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। ईद-उल-अजहा मजहबी त्योहार के साथ ही इंसानियत निभाने का भी पर्व है। मुसलमानों को ईद के दिन की शुरूआत दो रकात नामज वाजिब से करना है। मुसलमान नामज आद करने के बाद कुर्बानी देकर अपने रकब को राजी करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुर्बानी के अवशेष को किसी गढ्ढे में दफन कर देना चाहिए।

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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