विधि महाविद्यालय में विधि संकाय की पढ़ाई शुरू कराने की मांग हेतु स्मार

विधि महाविद्यालय में विधि संकाय की पढ़ाई शुरू कराने की मांग हेतु स्मार

सत्येन्द्र कुमार शर्मा

आर एस ए का एक प्रतिनिधिमंडल जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलसचिव से मिलकर गंगा सिंह विधि महाविद्यालय को पुनः चालू करने हेतु एवं जयप्रकाश विश्वविद्यालय स्थित कैंपस में विधि संकाय के निर्माण के संबंध में स्मार पत्र सौंपा । स्मार पत्र देने के बाद छात्र नेता कुणाल सिंह ने कहा कि छपरा न्याय शास्त्र के प्रणेता महर्षि गौतम की धरती है। महर्षि गौतम ने दुनिया को भारतीय विधिशास्त्र से अवगत कराया था। ऐसे स्थान पर विधि का एक स्तरीय शिक्षण संस्थान होना बिहारी गौरव को स्थापित करने के साथ विधि शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े क्षेत्र के लिए उपलब्धि होगी। छपरा में विधि का एक पुराना महाविद्यालय गंगा सिंह विधि महाविद्यालय स्थापित है अपने स्थापना का 50 वर्ष पूर्ण कर लिया है। इस महाविद्यालय के पास ना तो अपना भवन हैं और ना ही अभी तक स्थाई शिक्षक । इसलिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया से इसे स्थाई मान्यता कभी नहीं मिली है ।पिछले कई वर्षों से इसका मान्यता भी नहीं है। जयप्रकाश विश्वविद्यालय ने अपने सिंडिकेट और सीनेट के बैठक में इस महाविद्यालय को जयप्रकाश विश्वविद्यालय के संकाय के रूप में स्थापित करने का निर्णय पूर्व में लिया है। लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है । जयप्रकाश विश्वविद्यालय के प्रस्तावित गंगा सिंह विधि संकाय के निर्माण मैं तेजी लाया जाए । प्रस्तावित विधि संकाय में विधि स्नातक से लेकर पड़ा स्नातक की पढ़ाई सुनिश्चित कराई जाए। विधि संकाय में तुरंत पद स्वीकृत करके स्थाई एवं योग्य शिक्षकों की नियुक्ति हो। विधि संकाय में महर्षि गौतम अध्ययन केंद्र बने। साथ ही साथ गंगा सिंह विधि महाविद्यालय में जो वर्षों से पढ़ाई बंद है। मान्यता के अभाव में मान्यता दिला कर गंगा सिंह विधि महाविद्यालय में भी पढ़ाई प्रारंभ किया जाए। उन्होंने आगे कहा कि
जेपीविवि प्रशासन नये कोर्स तो शुरू नहीं कर पा रहा है, वहीं पुराने कोर्स भी धीरे-धीरे बंद होते जा रहे हैं। जेपीविवि का गंगा सिंह लॉ कॉलेज बंद होने के कगार पर है। बार काउंसिल द्वारा कॉलेज की व्यवस्था मानक के अनुरूप नहीं होने के कारण वर्ष 2012 में ही तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में नये नामांकन पर रोक लगा दी गयी थी। बहरहाल, विगत सत्र 2012-13, 2013-14 तथा 2014-15 में लॉ कॉलेज में एक भी छात्र का नामांकन नहीं हो पाया ।
मालूम हो कि गंगा सिंह कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य व छपरा बार काउंसिल के सदस्यों तथा शहर के शिक्षाविद के प्रयास से 1965 में छपरा जिले में लॉ कॉलेज की स्थापना की गयी थी। उस समय बिहार विश्वविद्यालय के अंतर्गत तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में नामांकन के साथ ही पढ़ाई शुरू की गयी ।बाद में बिहार विश्वविद्यालय से टूट कर जेपीविवि की स्थापना होने के बाद लॉ कॉलेज जेपीविवि के अधीन संचालित होने लगा।
सारण प्रमंडल में लॉ की पढ़ाई के लिए इकलौता कॉलेज होने के कारण लॉ की पढ़ाई का सपना रखनेवाले छपरा, सीवान, गोपालगंज के छात्रों को इससे काफी लाभ भी हुआ। हर साल काफी संख्या में यहां के छात्र कम खर्च में लॉ की पढ़ाई करने में सफल होते थे।
नामांकन पर रोक लगाने के बाद हरकत में आये कॉलेज प्रशासन द्वारा गंगा सिंह कॉलेज के ही हिस्से में लॉ कॉलेज को स्वतंत्र इकाई के रूप में स्थापित किया गया। बहरहाल, वर्ष 2013 के नवंबर में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम द्वारा कॉलेज पहुंच कर लॉ की पढ़ाई के लिए उपलब्ध संसाधन समेत अन्य चीजों की जांच की गयी थी।
टीम के निरीक्षण में फिर से नामांकन की अनुमति मिलने की उम्मीद बढ़ी थी।मगर टीम के निरीक्षण के बाद में अनुमति नहीं मिला।
जयप्रकाश विश्वविद्यालय में वर्षों से बंद लॉ की पढाई का मुद्दा विधानसभा में उठा था।
इसका जबाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा था की जयप्रकाश यूनिवर्सिटी से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार एलएलबी पाठ्यक्रम के लिए बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया की मान्यता आवश्यक है,और बार कॉउन्सिल से मान्यता प्राप्त करना यूनिवर्सिटी का अपना क्षेत्राधिकार है|
बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार किसी पाठ्यक्रम के संचालन हेतु विश्वविद्यालय ही सक्षम प्राधिकार है । माननीय मंत्री ने उचित पहल करने का आश्वाशन दिया था 2019 में। लेकिन अभी तक कुछ नही हुआ। संगठन मांग करती है कि इस पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से विवेक कुमार गोलू,अभिषेक कुमार, अमरेश सिंह राजपूत,विकास सिंह सेंगर
आदि उपस्थित रहे। उक्त आशय की जानकारी विवेक कुमार गोलू
आर एस ए ने दिया है।

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