जेंडर सोसायटी विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन

जेंडर सोसायटी विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन

प्रमोद कुमार

मोतिहारी  :  महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी बिहार के समाजशास्त्र विभाग के तत्वाधान में दो दिवसीय जेंडर सोसायटी विषय पर ऑनलाइन राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन दिनांक 29 एवम् 30 जुलाई को किया गया।राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर,सुजीत कुमार चौधरी ने कियाl अध्यक्षता संकायध्यक्ष प्रोफेसर,राजीव कुमार ने किया।संगोष्ठी के प्रथम सत्र में विशिष्ट वक्ता के रूप में हैदराबाद विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर रेखा पांडे जो सोसाइटी फॉर एंपावरमेंट डेवलपमेंट की डायरेक्टर भी है। इन्होंने “जेंडर इक्वलिटी” पर व्याख्यान देते हुए कहा कि “एवरी ओमेन एवरी अपॉर्चुनिटी” प्रत्येक सामाजिक काम में औरत का हाथ होता है। यह सही नहीं है कि सभी आदमी डोमिनेंट नेचर के ही होते हैं या सभी घरों में लड़की के अपेक्षा लड़कों को ज्यादा जगह दिया जाता है। फिर भी बहुत सारी कमियां आज भी हमारे समाज में विद्यमान हैं जैसे दहेज प्रथा, सेक्स सेलेक्ट कर गर्भपात कराना, दूधो नहाओ पूतो फलो जैसे आशीर्वाद आज भी दिया जाता है। जेंडर इक्विटी से ही जेंडर इक्वलिटी का प्रोसेस शुरू होता है। परिवार ही पहला प्रोटेक्शन होना चाहिए लड़कियों के लिए। इन्होंने यूएनडीपी रिपोर्ट, सेक्सुअल हैरेसमेंट, आईपीसी सेक्शन,बाल विवाह खत्म करना, विशाखा जजमेंट, चुनाव में महिलाओं की सीट, घरेलू हिंसा जैसे कई मुद्दों पर चर्चा किया। सिर्फ महिला ही नहीं पुरुष का भी साथ मिलकर काम करना जेंडर इक्वलिटी है।राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती, विद्या सागर जैसे कई समाज सुधारक ने मिलकर महिलाओं के उत्थान के लिए काम किया है।उन्होंने कहा कि सिर्फ महिलाओं की समानता ही मानव समानता नहीं है,एक विचार के रूप में समानता इतना सरल और सहज नहीं है।दूसरे वक्ता महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के सहायक अध्यापक संजय कुमार ने “अंडरस्टैंडिंग मैसकुलीनीटी इन कंटेंपरेरी इंडिया” विषय के अंतर्गत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि रेप पीड़िता, घरेलू हिंसा, डोमेस्टिक वायलेंस , रूरल एरिया और ट्रेडिशनल पंचायत पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि गांधी और गौतम बुद्ध के मार्ग को अपनाना जरूरी हैlइस राष्ट्रीय वेबिनार की रिपोर्टिंग शोधार्थी, दीपिका कुमारी ने किया।इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी गणमान्य शिक्षाविद् डॉ. जुगल दाधीच, डॉ विजय कुमार शर्मा, डॉ मृत्युंजय, तथा शोधार्थी, पूर्णिमा,अनु,अरशीदअली,अशोक,राजश्री, पल्लव, शाश्वत, आदर्श, अली, शशांक, ऋषित, राज, अभिनव के साथ देश विदेश के विभिन्न हिस्सों से 2000 की संख्या में प्राध्यापक प्रतिभागी शोधार्थी व छात्र-छात्राएं फेसबुक लाइव के माध्यम से भी शामिल हुए।

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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