सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत से समस्त मनोकामनाओं की प्राप्ति सम्भव

सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत से समस्त मनोकामनाओं की प्राप्ति सम्भव

प्रमोद कुमार

मोतिहारी : बिहार की पावन धरती से निकलकर भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में फैले लोक आस्था का महान पर्व चतुर्दिवसीय सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत के तीसरे दिन शुक्रवार को व्रती पूजनोपरांत सायंकाल 5 बजकर 21 मिनट पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। वहीं कल अर्थात् शनिवार को प्रातःकाल सूर्योदय समय 6 बजकर 39 मिनट पर उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस चार दिवसीय अनुष्ठान का विधिवत समापन हो जाएगा।उक्त जानकारी महर्षिनगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने दी।उन्होंने बताया कि स्कन्दपुराण के अनुसार सूर्यषष्ठी (छठ) प्रमुख रूप से भगवान सूर्य का व्रत है। सूर्य भगवान के साथ-साथ इसमें षष्ठी (छठी) माता की प्रतिमा बनाकर उनका पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि पंचमी के सायंकाल से ही घर में छठी माता का आगमन हो जाता है। इस व्रत में अस्तगामी एवं उदयगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और पूजन किया जाता है। छठ पूजा में ईंख,आदी,मूली,कच्ची हल्दी, अरवी, सुथनी, बोड़ी, गागल, नीम्बू, पान, सुपारी, लौंग,इलायची आदि औषधियाँ तथा केला, नारियल, सिंघाड़ा एवं अन्य ऋतुफल आदि का प्रयोग अर्घ्य देने में किया जाता है। इस व्रत में आटे और गुड़ से युक्त घी में ठेकुआ विशेष रूप से बनाने का विधान है। ठेकुआ पर लकड़ी के साँचे से भगवान सूर्य के रथ के चक्र को अंकित किया जाता है। छठ पूजा में लाल चंदन,पुष्प,धूप,दीप आदि का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। सायंकालीन अर्घ्य देने के पश्चात् घर पर एवं प्रातःकालीन अर्घ्य के पहले छठ घाट पर कोसिया भरने की भी परंपरा है।प्राचार्य पाण्डेय ने बताया कि यह व्रत बड़े नियम तथा निष्ठा से किया जाता है। इसमें स्वच्छता का भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इस व्रत का प्रसाद माँगकर खाने का विशेष महत्व है। इस व्रत को करने से समस्त मनोकामनाओं की प्राप्ति सम्भव हो जाता है। छठ का व्रत अन्य सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ साथ पुत्र कामना के लिए भी किया जाता है।

Next Post

लोगों का निष्पक्ष चौतरफा विकास करना मेरा लक्ष्य : भावी समिति प्रत्यासी जयकरण यादव

Fri Nov 20 , 2020
Share on Facebook Tweet it Pin it लोगों का निष्पक्ष चौतरफा विकास करना मेरा लक्ष्य : भावी समिति प्रत्यासी जयकरण […]

मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

Quick Links