राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सत्य एवं अहिंसा से प्रेरित था मार्टिन लूथर किंग का जीवन दर्शन 

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की सत्य एवं अहिंसा से प्रेरित था मार्टिन लूथर किंग का जीवन दर्शन

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया  :   अमेरिकी नागरिक अधिकारों एवं रंगभेद नीति के प्रबल विरोधी मार्टिन लूथर किंग की 53 वी शहादत दिवस पर, सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन द्वारा दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि! सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सभागार सत्याग्रह भवन में ,अमेरिका में रंगभेद नीति के प्रबल विरोधी एवं नागरिक अधिकारों के नायक मार्टिन लूथर किंग की 53 वी शहीद दिवस पर ,सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन श्रद्धांजलि दिया गया दिया! अवसर पर, एजाज अहमद अधिवक्ता एवं प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के चांसलर सह गांधीवादी चिंतक डॉ0 सुरेश कुमार अग्रवाल ने महात्मा गांधी मार्टिन लूथर किंग एवं विश्व दुनिया भर में मानव अधिकारों एवं रंगभेद नीतियो विरुद्ध नायक के रूप में भूमिका निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की ,जिन्होंने नागरिक अधिकारों एवं सामाजिक न्याय के लिए अपने प्राण निछावर किया! इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक डॉ0 एजाज अहमद (अधिवक्ता) ने कहा कि
नागरिक अधिकारो के महानायक मार्टिन लूथर किंग ने महात्मा गांधी के “सत्य-बल” के साथ उत्पीड़न के लिए खड़े होने की शक्ति का एहसास कराया।
महात्मा गांधी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध नागरिक अधिकारों के नायक मार्टिन लूथर किंग जूनियर सहित दुनिया भर के लोगों को प्रेरित किया।मार्टिन लूथर किंग जूनियर की आयु 19 वर्ष की थी जब गान्धी की हत्या 30 जनवरी 1948 को कर दी गई थी! मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपने लेखन और 1959 में भारत की यात्रा के माध्यम से गांधी के बारे में जानने का अवसर प्राप्त हुआ । मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपने स्वयं के नागरिक अधिकार सक्रियता, लेखन में अहिंसा के गांधीवादी सिद्धांत पर भारी पड़ गए। “जब मोंटगोमरी का बहिष्कार चल रहा था, भारत का गांधी अहिंसक परिवर्तन की हमारी तकनीक का मार्गदर्शक था।”अहिंसा” केवल इस बात से सहमत होने से अधिक है कि आपने अपने दुश्मन पर शारीरिक हमला नहीं किया, गांधी ने अहिंसा के अपने स्वरूप का उल्लेख किया, जिसका अर्थ है “सत्य-बल” या “प्रेम-बल”। सत्याग्रह का अभ्यास करने का मतलब है कि एक व्यक्ति को अहिंसक प्रतिरोध के माध्यम से इनकार करने के दौरान सच्चाई और प्रेम की तलाश करनी चाहिए, जिसमें वह मानता है कि कुछ गलत है। इस सिद्धांत ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ गांधी की सक्रियता को निर्देशित किया,15 अगस्त 1947 में भारत को स्वतंत्रता दिलाने में मदद की। भारत अपनी स्वाधीनता की 75 वीं वर्षगांठ मना रहा है ,भारत एवं विदेशों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमृत महोत्सव द्वारा नई पीढ़ी को भारत की स्वाधीनता का इतिहास एवं अपने स्वतंत्रता आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों के दिए गए त्याग एवं बलिदान को अमृत महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को जानने का अवसर प्राप्त होगा!इस अवसर पर गांधीवादी चिंतक सह चांसलर प्रज्ञान अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय डॉ0 सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि मार्टिन लूथर किंग ने पहले गांधीवादी छात्र के रूप में गांधी की अहिंसा की अवधारणा को सीखा। एक ईसाई के रूप में, उन्होंने अपने विचारकों के शब्दों को सत्याग्रह एवं अहिंसा की अपील से जोड़ा ! साथ ही पूरा विश्व एक परिवार है की मान्यता के अनुरूप अपने दुश्मनों से प्यार करो और उन लोगों के लिए प्रार्थना करो जो आपको परेशान करते हैं अमल करना आरंभ किया!मार्टिन लूथर किंग ने लिखा, “मैं पहली बार यह देखने आया था कि अहिंसा की गांधीवादी पद्धति के माध्यम से काम करने वाले मानवीय सिद्धांत प्रेम के सबसे शक्तिशाली हथियारों में से एक थे।”इस ओसर पर ,शाहनवाज अली, अमित कुमार लोहिया ,जाकिर मोहम्मद शेख का कहना है कि “उन्होंने “अहिंसा” को सभी लोगों के प्यार की अभिव्यक्ति के रूप में देखा।” “यह लोगों तक पहुँचने और उन्हें आपके कारण की शुद्धता के बारे में समझाने का एक तरीका है।”
मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपनी 1959 की यात्रा के दौरान नई दिल्ली, भारत में महात्मा गांधी के समाधि स्थल का दर्शन किया था!मार्टिन लूथर किंग ने अपनी यात्रा के बाद एबोनी में लिखा, “एक अहिंसक अभियान के अद्भुत परिणामों को देखना एक अद्भुत बात थी।” “नफरत और कड़वाहट के बाद जो आमतौर पर एक हिंसक अभियान का अनुसरण करता है वह भारत में कहीं नहीं पाया गया, आज भारतीय और ब्रिटिश लोगों के बीच पूर्ण समानता पर आधारित एक पारस्परिक मित्रता आम है। ” इस अवसर पर, वक्ताओं ने कहा कि महात्मा गांधी की सत्य अहिंसा एवं आपसी प्रेम का सिद्धांत हजारों वर्षों से हमारे धर्म ग्रंथों में मौजूद है सभी धर्म मानव में समानता सामाजिक न्याय एवं मानव समृद्धि के विचारों को प्रेरित करते हैं इन्हीं सिद्धांतों को महात्मा गांधी ने सत्याग्रह एवं अहिंसा के माध्यम से मानव जीवन को और भी सुखमय बनाने का प्रयास किया है हम आशा करते हैं कि आने वाले दिनों में पूरी मानव जाति कोरोना वायरस अंतर्मन से निकल पाएगी कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्ति में महात्मा गांधी एवं मार्टिन लूथर किंग के विचार नई पीढ़ी को बल प्रदान करेंगे!

Next Post

बेतिया नगर निगम ने 17 पंचायतों की मुखियों की कुर्सी छीन ली

Mon Apr 5 , 2021
Share on Facebook Tweet it Pin it बेतिया नगर निगम ने 17 पंचायतों की मुखियों की कुर्सी छीन ली शहाबुद्दीन […]

मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

Quick Links