पौराणिक यंत्र संसाधनों की महत्ता एवं मांग

पौराणिक यंत्र संसाधनों की महत्ता एवं मांग

सत्येन्द्र कुमार शर्मा

सोमवार 16 नवंबर : कार्तीक मांस विभिन्न देवी देवताओं के पूजन विधि विधान के साथ करने का माह है। इस पूजा पाठ में आज भी पौराणिक संसाधनों की महत्ता कायम है।
भैया दूज के दिन गोधन प्रतिमा निर्माण में गाय के गोबर का प्रयोग किया जाता है।श्रापने के लिए रेंगनी का कांट का प्रयोग किया जाता है। तो दूसरी ओर मिट्टी का बना हांड़ीं भोजन पकाने का पात्र का प्रयोग प्रतिमा निर्माण के रुप में शामिल किया जाता है। वहीं उस पात्र को कुटने (फोड़ने) के लिए मुसल जो खाद्यान्न तैयार करने के काम आता है का उपयोग किया जाता है।
चित्रगुप्त पूजा में कलम दवात पूजा के लिए आवश्यक संसाधन है।
तो बीती रात महिलाएं अपने घरों से दरिद्रता को भगाने तथा ईश्वर को बुलाने के निमित्त सुप,कड़ा, हंसिया का उपयोग किया गया।
छठ पूजा में बांस के बने विभिन्न पात्रों का प्रयोग किया जाता है।
इन संसाधनों के पूजन में शामिल करने से इनकी महत्ता आज भी यथावत है।

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“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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