योग का पाठ पिता से शुरू फादर्स डे इज योग डे

योग का पाठ पिता से शुरू फादर्स डे इज योग डे

सत्येन्द्र कुमार शर्मा,

पिता हमें सांस्कृतिक विरासत में मिलते हैं। हमारी भारतीय संस्कृति के पुस्तकें इसके प्रमाणित साक्ष्य है।
धार्मिक पुस्तकों में एक पुस्तक रामायण है। रामायण में एक कुल जिसमें मार्यादा पुरूषोत्तम राम की कथा पढ़ी जाती है। जिसके संदर्भ में आमतौर पर कहा जाता है कि रघु कुल रित सदा चली जाए प्राण जाए पर वचन ना जाए। दशरथ द्वारा कैकई को वचन दिया गया जिसे कृतार्थ करने के लिए राम को राजसिंहासन को छोड़कर जंगलों में जीवन जीने के लिए सहर्ष स्वीकार कर निकल पड़ना ही पिता के द्वारा प्रदत्त योग साधना है। राजकुमार रामचंद्र से मार्यादा पुरूषोत्तम राम बनने के लिए पिता के दुलार के वचन ही योग है।
दूसरी पुस्तक महाभारत है।आज संचार माध्यम के प्रसारणों के कारण इस पुस्तक के बारे में विस्तार से चर्चा करना लाजमी नहीं है।महज एक पात्र भीष्म पितामह का सम्पूर्ण जीवन पिता के वचन ने ही इच्छा मृत्यु तक का सफर तय कराया है।
अतएव अब हमें कहने में कोई संकोच नहीं है कि पिता दिवस प्रतिदिन प्रतिक्षण है उसमें अर्द्धागींणी के पिता का योगदान शामिल हैं।
दूसरी ओर हम पिता के भाई के गोद यानी चाचा के गोद में खेले प्यार दुलार मिला वह भी इससे अलग नहीं है।हम उनसे भी योग की शिक्षा लेते हैं।
“बच्चा नागरिकता का प्रथम पाठ पिता के दुलार से सिखता है।”ये बात महान विद्वान मेजनी ने कहा है।

शिक्षाविद पूर्व विधायक डॉ. रमाकांत पांडेय के शब्द आज के संदर्भ में उनके ही शब्दों में “पिता के बिना तो जीवन संभव नहीं, इसलिए हर दिन पिता दिवस ।मेरा हार्दिक प्रणाम मेरे बाबूजी, चाचा एवं मेरे स्वसुर,( जो जीवन के बड़े हिस्से के पिता होते है) को।”
संस्कार में जीवन जीने की बात पिता पक्ष की ही है। संस्कार योग से अलग नहीं है। हमारी संस्कृति ने हमें योग के लिए पिता से पहचान कराई। धरा के सभी जिवों में सिर्फ मानव जाति को ही पिता का ज्ञान है । और विश्व पितृ प्रधान है और रहेगा।
हमारे कर्म अर्थात कार्य पिता के कार्य से ही शुरू होता रहा है।हाल में भले ही कुछ बदलाव हुआ है। मानव शतायु है। और शतायु रहने के लिए पिता के कार्य पर एक नजर डालना पड़ जाता रहा है।
बहरहाल हमारे संस्कृति में पितृ पक्ष मनाया जाता है। फादर्स डे आज मनाया जा रहा है उससे योग दिवस का संबंध जोड़ने का प्रयास किया गया हैै जो हमारे सभ्यता संस्कृति का अनुकरण मात्र है।

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