अटूट रिश्तों का महापर्व भैया दूज श्राप और आशीर्वाद द्वापर से परंपरागत

अटूट रिश्तों का महापर्व भैया दूज श्राप और आशीर्वाद द्वापर से परंपरागत

सतेन्द्र कुमार शर्मा

सोमवार 16 नवंबर : कार्तीक मांस के द्वितीया तिथि भाई बहन के अटूट रिश्ते का महापर्व भैया दूज को द्वापर से ही परंपरागत ढंग से मनाया जा रहा है। शुभ मुहूर्त प्रात: कालीन बेला में प्रतिमा निर्माण,श्रापने एवं प्रतिमाओं को कुटने आदि कार्य को विधि विधान में अहले सुबह से ही सभी बालिका महिला जुटी रही।
बालिका महिला ‌बहनों द्वारा आज अपने भाई को श्रापन की परंपरा का निर्वहन किया गया। कार्तिक शुक्लपक्ष द्वितीया तिथि भ्रातृ द्वितीया भैया दूज के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त इस महापर्व की तैयारी एक दिन पहले से ही किया जाता रहा है।
एक दिन पहले महिलाएं गोबर से विभिन्न प्रतिमाओं का निर्माण करती है।
प्रत्येक बालिका महिला बहन द्वारा अपने भाइयों को श्रापने की परंपरा का निर्वाह विधि विधान के साथ किया गया। प्रतिमा निर्माण से लेकर बहनों द्वारा अपने जिह्वा पर रेंगनी के काँटों को चुभा कर श्रापने का कार्य किया गया। ऐसी मान्यता है कि इस दिन बहन का श्राप भाईयों के लिए आशीर्वाद होता है। बहनें इस दिन व्रत रखकर भाई के माथे पर तिलक लगाकर भाई के दीर्घ जीवन की कामना करतीं हैं। बहनें अपने भाइयों को चना मटर के साथ मिष्ठान भोजन कराती है।
आज के दिन अपने घर भोजन नहीं कर बहन के घर जाकर उनके हाथ का बना हुआ भोजन करना श्रेयस्कर माना जाता है।इससे बल,पुष्टि,धन,यश,आयु,धर्म,अर्थ और अपरिमित सुखों की प्राप्ति होती है।

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