असहयोग आंदोलन शताब्दी वर्ष पर स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि 

असहयोग आंदोलन शताब्दी वर्ष पर स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया ,शनिवार 1 अगस्त 20 : सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सचिव सह संयुक्त राष्ट्र संघ के वाणिज्य एवं सामाजिक परिषद के चेयरमैन ,डॉ एजाज अहमद (अधिवक्ता) ने असहयोग आंदोलन शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, अमर शहीदों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज ही के दिन आज से 100 वर्ष पूर्व 01 अगस्त 1920 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने, हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के साथ असहयोग आंदोलन का आरंभ किया था !ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की,लगभग 2 वर्षों तक चले असहयोग आंदोलन में, 90 हजार छात्रों ने स्कूल कॉलेज छोड़कर ,राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था! लाखों वकीलों, डॉक्टरों ,प्रशासनिक अधिकारियों,सरकारी कर्मियों एवं श्रमिकों ने इस्तीफा देकर देश की स्वतंत्रता एवं असहयोग आंदोलन भाग लेते हुए राष्ट्र पिता ,महात्मा गांधी का साथ दिया था !विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया गया एवं विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई थी! इस अवसर पर डॉ0 शाहनवाज अली ने कहा कि 01 अगस्त 2020 से आरंभ असहयोग आंदोलन, शताब्दी वर्ष का आयोजन 2 वर्षों तक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, विश्वविद्यालयों एवं भारत सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा संयुक्त रुप से कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा! राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों एवं मूल्यों सत्य अहिंसा ,आपसी प्रेम, विश्व शांति एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक विषयों पर विशेष रुप से नई पीढ़ी छात्रों एवं शोधार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों से आवत कराई जाएगी !राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चंपारण के अनुभव को भी देश दुनिया के समक्ष रखा जाएगा! इस अवसर पर बिहार विश्वविद्यालय के डॉ0 शाहनवाज अली एवं पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन ने कहा कि चंपारण सत्याग्रह , ऐतिहासिक हजारीमल धर्मशाला, ऐतिहासिक राज हाई स्कूल के भितिहारवा आश्रम वृदावन आश्रम मे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अनुभव को भी साझा किया जाएगा ! भितिहरवा आश्रम, मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं भागलपुर तिलकामांझी विश्वविद्यालय गांधी विचार विभाग में भी कई आयोजन किए जाएंगे!

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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