लोकतंत्र की रक्षा ,नागरिक अधिकारों एवं प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले विभूतियों दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि !

लोकतंत्र की रक्षा ,नागरिक अधिकारों एवं प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले विभूतियों दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि !

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया ,गुरुवार 25 जून 20
सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन के सचिव डॉ0 एजाज अहमद (अधिवक्ता) ने आपातकाल की 45 वीं वर्षगांठ पर लोकतंत्र की रक्षा , नागरिक अधिकारों एवं प्रेस की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहां आज ही के दिन भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा तत्कालीन ,राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने कि थी, तत्कालीन प्रधानमंत्री, इंदिरा गांधी के अनुशंसा पर की थी! स्वतंत्र भारत में आपातकाल 1962 में भारत चीन- युद्ध के बाद के हालात के समय लगाई गई थी ,दूसरी बार 1971 में भारत -पाकिस्तान युद्ध के समय व तीसरी बार 1975 में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लगभग 21 महीने तक आपातकाल लगाई गई थी !भारतीय संविधान द्वारा तीन तरह के आपातकाल का प्रावधान है !प्रथम भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन विकट परिस्थितियों में प्रधानमंत्री की अनुशंसा पर राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं! इसमें सभी नागरिक अधिकार छीन लिए जाते हैं !प्रेस की स्वतंत्रता समाप्त कर दी जाती है !राष्ट्रपति शासन संविधान की धारा 356 के अधीन राज्यों में विकट परिस्थिति के समय आपातकाल लगाने का प्रावधान है! इसके साथ ही संविधान की धारा 360 के अंतर्गत आर्थिक आपातकाल की घोषणा सरकार कर सकती है! इस अवसर पर डॉ शाहनवाज अली एवं पश्चिम चंपारण कला मंच के संयोजक, शाहीन परवीन ने कहा कि आपातकाल के समय हजारों हजार लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा, नागरिक अधिकारों , प्रेस की स्वतंत्रता एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध विभूतियों ने जो काम किया, वह बधाई के पात्र हैं! उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बगैर भारत के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए थे! उन विभूतियों के अतुल्य योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता! इस अवसर पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं सामाजिक न्याय के प्रवर्तक, विश्वनाथ प्रताप सिंह को 92वी जन्मदिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ,पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक ,शाहीन परवीन ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री, विश्वनाथ प्रताप सिंह का सारा जीवन समाज के लिए समर्पित रहा !समाज के दलित- अल्पसंख्यक एवं विशेष रूप से आर्थिक रूप से उपेक्षित वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाने के लिए उन्हें हर संभव प्रयास किया!

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मुख्य संपादक: विकाश कुमार राय

“अपना परिचय देना, सिर्फ अपना नाम बताने तक सीमित नहीं रहता; ये अपनी बातों को शेयर करके और अक्सर फिजिकल कांटैक्ट के जरिये किसी नए इंसान के साथ जुड़ने का तरीका है। किसी अजनबी इंसान के सामने अपना परिचय देना काफी कठिन हो सकता है, क्योंकि आप उस वक़्त पर जो भी कुछ बोलते हैं, वो उस वक़्त की जरूरत पर निर्भर करता है।”

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