अदबी संगम बेतिया के बैनर तले, गुलशन ऑर्थो एंड ट्रॉमा सेंटर में ,महफिल ए मुशायरा का हुआ आयोजन

अदबी संगम बेतिया के बैनर तले, गुलशन ऑर्थो एंड ट्रॉमा सेंटर में ,महफिल ए मुशायरा का हुआ आयोजन

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया 20 नवम्बर: अदबी संगम बेतिया के बैनर तले ,गुलशन ऑर्थो एंड ट्रॉमा सेंटर, मनुआपुल बेतिया में, महफिल ए मुशायरा का आयोजन सऊदी अरब( जद्दा) से आए ,अंतरराष्ट्रीय प्रख्यात शायर व प्रचंड व्याख्याता, इतिहासकार, लेखक, अफरोज आलम के संबोधन के साथ, उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों एवं शायरों के बीच हुआ । इस अवसर पर ही एक और प्रख्यात, नव युवक शायर, अमित झा राही, महाराष्ट्र के पुणे से तशरीफ लाए थे, इन दोनों  शायरों ने महफिले मुशायरा को अपने शब्दों में लपेटकर, चार चांद लगा दिया । इसके साथ ही, इस कार्यक्रम के संचालक, प्रख्यात शायर, कलमकार,आलोचक, लेखक, साहित्यकार व अदबी संगम, बेतिया के सेक्रेटरी, डॉक्टर नसीम अहमद नसीम ने अपने संबोधन में, शब्दों के मिठास और जादुई शब्दों के उतार-चढ़ाव से , महफिल को समेटते हुए महफिल में ,चार चांद लगाकर, उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस महफिल ए मुशायरा की अध्यक्षता, मशहूर शायर व अदबी संगम बेतिया के अध्यक्ष, अबुल खैर निष्तर ने अंजाम दिया, इस महफिल ए मुशायरा में सभी प्रख्यात शायरों ने अपने-अपने कलाम से उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को अपने आप में समाने पर मजबूर कर दिया।
सऊदी अरब( जद्दा) से आए हुए, प्रख्यात शायर , लेखक साहित्यकार ,अफरोज आलम ने कहा कि उर्दू भाषा को ऊंचे स्थान तक पहुंचाने में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, अदबी संस्थाओं ने अहम रोल अदा किया है, पश्चिम चंपारण के इस धरती की शुरू से ही यही इतिहास रहा है कि यहां की भूमि उर्दू जुबान की विकास व उर्दू अदब की एक इतिहासिक भूमि रही है, यहां के शायरों की अथक मेहनत से उर्दू जुबान की तरक्की आज आसमान छू रही है, इसमें मुख्य भूमिका स्थानीय शायरों और कवियों, लेखकों साहित्यकारों की कम नहीं है, इसी क्रम में, पुणे महाराष्ट्र से आए नौजवान शायर, अमित झा रही ने भी कहने पर मजबूर हुए कि पश्चिम चंपारण की भूमि सामाजिक सौहार्द, भाषाई प्रगति की एक ऐतिहासिक भूमि रही है, मैं भी इसी जिले का उपज हूँ । उन्होंने आगे कहा के महात्मा गांधी की यह भूमि शायरों, कवियों,अदीबों, इतिहासकारों, लेखको, आलोचकों के लिए जानी जाती है, इन्हीं लोगों के माध्यम से, पश्चिम चंपारण में उर्दू भाषा, साहित्य, संस्कृति परवान चढ़ी है, यहां के शायर, कवि ,इतिहासकार, लेखक, अपनी लेखनी व शायरी के माध्यम से ही आने वाले नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।
इस महफिल ए मुशायरा में, स्थानीय शायर, आजाद अजहर, जाकिर हुसैन जाकिर, अब्दुल मजीद खान मजीद, क्रेक बेतियवी, अरुण गोपाल, अबुल खैर निष्तर, हसन इकराम, हसन इमाम कासमी, कमरुज्जमा कमर, डॉक्टर नसीम अहमद नसीम, अफरोज आलम (जददा) अमित राही (पुणे), डॉक्टर जफर इमाम कादरी,अख्तर हुसैन वगैरा शायरों ने अपने-अपने कलाम से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया । इस मौके पर, जिन गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी साझेदारी निभाई उनमें, कुरआन घर एकेडमी, बेतिया के डायरेक्टर , रिजवान रियाजी, अदबी संगम बेतिया, के सरपरस्त, प्रख्यात चिकित्सक, डॉक्टर जावेद कमर ने इस महफिल मुशायरा में उपस्थित सभी शायरों एवं गणमान्य व्यक्तियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इस तरह के महफिल ए मुशायरा कार्यक्रम, का आयोजन शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भी होनी चाहिए । ताकि इससे नौजवानों और उभरते हुए शायरों की दिलचस्पी को बढ़ाया जा सके, साथ ही समाज के अंतिम पायदान तक के लोगों को इससे अपनी पहचान व उनकी रुचि को बढ़ाया जा सके, अंत में, अदबी संगम बेतिया के सरपरस्त, प्रसिद्ध हड्डी रोग विशेषज्ञ, शहर के मशहूर डॉक्टर, जावेद कमर ने उपस्थित सभी लोगों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हुए कार्यक्रम के समापन की उद्घोषणा की।

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