सीएसडीएस का बिहार में युवा सर्वेक्षण संपन्न

सीएसडीएस का बिहार में युवा सर्वेक्षण संपन्न

 

मोतिहारी।पु.च
युवाओं के बारे में कहा जाता है कि जहां तक रास्ता दिख रहा है वहां तक चलिए, आगे का रास्ता वहां पहुंचने के बाद दिखने लगेगा। इस अभिकथन को 1963 में स्थापित विकासशील समाज अध्ययन पीठ, नई दिल्ली युवा सर्वेक्षण से चरितार्थ करती नजर आ रही है। विदित हो कि सीएसडीएस के अधीन भारतवर्ष में युवा सर्वेक्षण के दो चरण पूर्व में ही संपन्न हो चुके हैं। तीसरे चरण का सर्वेक्षण देश में प्रक्रियाधीन है। इस कड़ी में अपना सुबा बिहार युवा सर्वेक्षण की सफलता का गवाह बना है। ज्ञात हो कि युवा सर्वेक्षण हेतु वैज्ञानिक पद्धति से बिहार प्रांत में ग्यारह जिलों के तहत सतरह प्रखंडों के अतंर्गत पंद्रह बड़े गाँवों व दो शहरों से नमूने का चयन किया गया है। ये जिले हैं- पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सुपौल, मधेपुरा  सीतामढ़ी, नवादा, किशनगंज, अररिया, रोहतास, औरंगाबाद एवं छपरा।

*टीम विवरणी*-  युवा सर्वेक्षण के प्रयोजनार्थ एक शोध टीम तैयार की गयी है जिसमें परियोजना निदेशक सीएसडीएस, लोकनीति के प्रो.संजय कुमार, राष्ट्रीय समन्वयक ज्योति मिश्रा व विभा अत्री हैं। बिहार राज्य समन्वयक के रूप में प.वि. के सह प्राध्यापक डॉ. राकेश रंजन, पर्यवेक्षकों में वीएम काॅलेज, पावापुरी के सहायक प्राध्यापक प्रो.विजय कुमार, एसयू काॅलेज, हिलसा के सहायक प्राध्यापक डॉ. मुकेश कुमार राय, बीएन कॉलेज, भागलपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ.इरशाद अली, जे.एल.काॅलेज, हाजीपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. रजनीश कुमार तथा एलएनडी काॅलेज, मोतिहारी के सहायक प्राध्यापक डाॅ. कुमार राकेश रंजन हैं। आंकड़े संग्रहण हेतु क्षेत्र में सुप्रशिक्षित बीस क्षेत्रीय अन्वेषक तैनात किए गए हैं। पूर्वी चंपारण हेतु नीरज आनंद, पिंटू कुमार, बृजेश कुमार व रोशन कुमार दुबे, मुजफ्फरपुर हेतु अंगद कुमार व हिमांशु कुमार, मधेपुरा हेतु विक्रांत कुमार व आलोक कुमार, सुपौल हेतु राम कुमार, सीतामढ़ी हेतु बैजनाथ कुमार, नवादा हेतु अरुण कुमार व मृत्युंजय कुमार, अररिया हेतु पिंटू कुमार व रूपेश कुमार, किशनगंज हेतु मो.श्यान, रोहतास हेतु शुभम कुमार, औरंगाबाद हेतु विक्रम कुमार व ऋषि कुमार तथा छपरा हेतु धीरज कुमार व नीतिश कुमार की नियुक्ति क्षेत्रीय अन्वेषक के रूप में की गयी है।

*कार्य की प्रकृति*- कार्यारंभ के पूर्व जुम एवं गूगल मीट प्लेटफार्म पर तीन चरणों में क्षेत्रीय अन्वेषकों को कठिन प्रशिक्षण दिए गए। सीएसडीएस, नई दिल्ली द्वारा अंतिम प्रशिक्षण 14 जुलाई को पूर्वाह्न 11 बजे जूम ऐप पर दी गई। इस विशिष्ट कार्य को पेन -पेपर मोड में न कर सीएसडीएस द्वारा विकसित कैनवास ऐप्स पर संपन्न किया गया है। क्षेत्र में जाने से पहले सभी क्षेत्रीय अन्वेषकों को पर्याप्त पूर्वाभ्यास कराया गया। चयनित क्षेत्रों में साक्षात्कार हेतु वैज्ञानिक पद्धति द्वारा उत्तरदाताओं की लक्षित सारणी को ध्यान में रखा गया।
आयु समुह    पुरूष+महिला=कुल
15-17 वर्ष     02+02=04
18-24  वर्ष    05+05=10
25-29 वर्ष     03+03=06
30-34 वर्ष     03+02=05
कुल         13+12=25

चंपारण पर्यवेक्षक व एलएनडी काॅलेज, मोतिहारी के सहायक प्राध्यापक डाॅ. कुमार राकेश रंजन ने बताया कि क्षेत्र में आंकड़े संग्रहण के दौरान इन क्षेत्रीय अन्वेषकों ने रेतीली, कंटीली व दुर्गम पथों पर चलते हुए बाढ़प्लावित इलाकों को भी कवर किया है। हमारे क्षेत्रीय अन्वेषकों ने साक्षात्कार के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का अक्षरश: अनुपालन किया है। प्रश्नकर्ताओं व उत्तरदाताओं ने झमाझम बारिश में छाता लगा कर भी अपने मिशन को पूरा किया है। कैनवास ऐप्स पर संपन्न युवा सर्वेक्षण में क्षेत्रीय अन्वेषक उत्तरदाता के समक्ष विस्तृत प्रश्नावली के प्रश्नों को पूछते हुए उनके उत्तर को प्रविष्ट किया है। आंकड़े संग्रहण के बाद सारणीकरण कर सीएसडीएस द्वारा इसका विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य में हमारे युवाओं के संबंध में नीतियां निर्मित हो सकती हैं। शिक्षक, शोधार्थी तथा छात्र भी इन आंकड़ों से अपने अध्ययन में लाभ ले सकते हैं।

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